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Showing posts from January, 2013

नेता चालीसा

देशवासियों तुम हमें सत्ता देंगे तो हम तुम्हें गुजारा भत्ता देंगे। सारे भूखे-नंगों की जमात को,  बिजली-पानी, कपड़ा-लत्ता देंगे।  विकास के वादे पे शक करलो,   विनाश,भ्रष्टाचार अलबत्ता देंगे।   तुम हमको शहद खिलाओ,हम   तुम्हें मधुमक्खी का छत्ता देंगे।   नक़द रक़म मुंतक़ली सियासी,                       मुंतक़ली  = अंतरण     इंतिख़ाबात   तुरुफ का पत्ता देंगे।                     इंतिख़ाबात  =चुनाव  टहलुआ   बन हमारे   तलवे चाटो,                    टहलुआ=गुलाम  वरना बता तुम्हें हम धत्ता देंगे।    

जनतंत्र रूपी चिलमन और (अ)धर्मनिर्पेक्षता !

शाहरुख ख़ान समेत भारत के उस बड़े तबके से मुझे कोई शिकायत नहीं है, जो यह सोचता है कि तमाम पड़ोसी मुल्कों समेत भारत को पाकिस्तान के साथ भी अच्छे संबंध रखने चाहिए, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में परस्पर सहयोग हो, खेल हो, संगीत हो अथवा व्यापार, क्योंकि हर मुल्क में बुरे और भले दोनों ही तरह के लोग होते है, और मेरे हिसाब से जब हम किसी मुल्क के पूरे आवाम के प्रति अपनी कोई राय बनाते है तो कम से कम हमें वहाँ पर सिर्फ कुछ नमूने उठाकर उसके आधार पर अंतिम निष्कर्षों पर नहीं पहुंचना चाहिए। बहुत से अमनपरस्त लोग उधर भी है और इधर भी। ये बात और है कि उनके और हमारे अमनपरस्ती के पैमाने भिन्न-भिन्न है। हमारे देश में अभिव्यक्ति की "तथाकथित" स्वतंत्रता है और जिसका भरपूर लाभ सभी मौक़ा-परस्त उठा भी रहे है। हो भी क्यों न, हरेक को अपनी बात कहने का पूरा हक़ है। लेकिन इस तमाम कहने सुनाने की प्रक्रिया के दौरान कुछ बातें ऐसी भी हो जाती है जो कहीं कोई टीस दिलों पर छोड़ जाती है। अब तक दूसरों की ही लिखी हुई कहने बाले सुपरहीरो ने एक पत्रिका के माध्यम से जब अपनी बात कही तो लोग यह देख कर चकित थे कि दूसरे क...

सावधान !

अंध,मूक,वधिर,अहमक़,खोटा, न कोई ठठोल,ऊल-जुलूल बैठे , भीड़-तन्त्र की डाल पर मित्रों, अब और न कोई "फूल" बैठे। न किसी और को तोहमत देना, सोच-समझकर तुम मत देना, वरना उसने जो खर्चा है खुद पर, कहीं तुम्ही से न सब वसूल बैठे। स्पर्धी सब हैं बड़े खुदगर्ज ये, बनकर भूल जाते है फर्ज ये, वरण का दौर गुजरने के बाद, वो कहीं तुम्हे ही न भूल बैठे। गिद्ध बैठे है गोश्त की चाह में, फूंक कर रखो कदम तुम राह में, तरजीह हरगिज न ऐसी हो कि अपने ही पांव शूल बैठे।

कार्टून कुछ बोलता है - पड़ोसी मेहरबान तो ....

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कार्टून कुछ बोलता है- पूत के पाँव पालने में .....

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कोण को गलत कोण से देखने की हमारी मानसिकता !

आगे चलकर एक परिवार की चरण-वंदना जीवन में कुछ प्राप्त करने, कुछ बनने के लिए इतनी महत्वपूर्ण हो जायेगी, ये बात अगर मुझे अथवा मेरे खानदान को पहले से पता होती तो सच कहता हूँ कि मैं  तो अपने बाप-दादा से भी यही कहता कि फालतू का देश सेवा का जज्बा मन में लिए  प्रथम विश्वयुद्ध ईराक में बसरा के मोर्चे पर लड़ने , 1962 और 1965 की लड़ाई  लद्दाख और गुरुदासपुर के मोर्चे पर लड़ने के बजाये , छोटे भाई को कहता कि 1999 का कारगिल युद्ध लड़ने के बजाये तत्परता से इस परिवार की चरण-वंदना में जुट जाओ, अपने खानदान, जाति,धर्म  को ही बुरा भला कहो, बड़े पदों पर बैठकर अपने धर्म को आतंक पैदा करने वाला धर्म कहो, अपनी देश-निंदा करो, जाति और धर्म की  राजनीति खुद करों, दो धर्मों और जातियों  के बीच कटुता खुद पैदा  करों  और कम्युनल( साम्प्रदायिक) दूसरों को बताओ ,और फिर देखिये कि चाहे हम हर जिम्मेदारी को निभाने में असफल ही क्यों न रहें, उत्तरी ग्रिड फेल हो जाए तो हो, देश आर्थिक रूप से दिवालियेपन...

खुर-पशु और पन्जा-तंत्र !

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यह बड़ी ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि देश के मौजूदा हालात पर एक नजर, उसके  भूत और भविष्य का आंकलन हमारे समक्ष कोई आशातीत, सकारात्मक परिदृश्य प्रस्तुत नहीं करता। ऐसा लगता है कि मानो पिछली सदियों की ही भांति इस तथाकथित शिक्षित और तकनीकि रूप से उन्नत और  प्रगतिशील सदी में भी हमने शीतलमय, उत्तेजनाविहीन रहकर सब कुछ भगवान भरोसे ही छोड़ दिया है। अगर मैं गलत नहीं तो  ऐसा प्रतीत होता है कि शायद हमारे पास विकल्पों का अकाल सा पड़ गया है।  पशु-पक्षी जगत में चूँकि अपनी एक ख़ासी रूचि है, इसलिए मैं डिस्कवरी एवं नेशनल जियोग्राफिकल चैनल बड़े ध्यान से   देखता हूँ।   पालतू और वन्य-जीव जगत में दो प्रकार के पशु-प्राणी, एक भेड और दूसरा बैल सदृश्य, खास अफ़्रीकी प्रजाति का मृग, जिसे अंग्रेजी भाषा में विल्ड़ेबीस्ट या विल्डबीस्ट के नाम से जाना जाता है, मैं समझता हूँ कि न सिर्फ मेरे लिए अपितु तमाम बुद्धिजीवी वर्ग के लिए हमेशा अध्ययन और कौतुहल के खासे विषय बने रहे है। वाकई बड़े अद्भुत किस्म के प्राणी है ये दोनों ही प्रकार क...

वाह रे वाह !

फिर  से सत्ता हथियाने के .जो देख रहे हैं  ख्वाब, लादेन उनके "जी" हुए, हाफिज सईद हुए "सहाब"। हाफिज सईद हुए सहाब, हिन्दू हो गए हैं आतंकी, ऊपर वाला ही जाने कब खत्म होगी यह  नौटंकी।। फूक में जो सपूत चढ़ाया, बोल गया कुछ यूं  धाँसू, सुनके उसके बोल, माँ की आँखों में आ गए आंसू। माँ की आँखों में आये आंसू, चिंतन खत्म हुआ सारा, मुझे मिला क्या इसी चिंतन में है आमजन बेचारा।। स्वार्थसिद्धि को अगर हमने, गधे बनाए बाप न होते, भाग्य-विधाता  मंत्री बने, आज अंगूठा-छाप न होते। आज अंगूठा-छाप न होते, किया धरा सब अपना है, लोकतंत्र में सच्चा स्वराज पाना, बन गया सपना है।।    

माँ ने कहा सत्ता जहर की तरह है, और भारत के लोग मेरी जान है:- राहुल गांधी

जयपुर में चल रहे कौंग्रेस के  "चिंतन शिविर" में कांग्रेस के "युवा" नेता और ताजा-ताजा बने कॉग्रेस के उपाध्यक्ष श्री राहुल गांधी  ने अपने भाषण में दो महत्वपूर्ण बातें कही;   "माँ ने कहा सत्ता जहर की तरह है, और भारत के लोग मेरी जान है। ",   मेरे हिसाब से जो कुछ इस देश के लोगों ने पिछले 9-10 सालों में इस देश में देखा,  उस आधार पर तो  मैं यही कहूंगा कि अगर  इस देश के लोगों में जागरूकता और सजगता नाम की कोई चीज लेस मात्र भी बाकी है तो उन्हें  राहुल गांधी को अब विनम्रता से यही जबाब देना चाहिए कि आपकी उपरोक्त बातों को सर-आँखों पर रखते हुए हम आपसे यही  गुजारिश करेंगे  कि चूँकि जैसा कि आपने खुद ही कहा है  कि भारत के लोग आपकी जान है, और सत्ता जहर है, तो आप कृपा करके  "अपनी जान" ( भारत के लोगों ) की  सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह जहर ( सत्ता) कदापि ग्रहण न करे, क्योंकि आपकी  "जान" बेश-कीमती है भारत के लोग इसे अब और  जोखिम...

सैकिंड-हैण्ड देह-नीलामी !

मान लो कि सैकिंड-हैण्ड गाड़ियों / सामान  की तरह ही इंसानों की भी बिक्री / नीलामी का प्रचलन होता तो मैं अपनी नीलामी का जो विज्ञापन निकालता  उसका मजमून कुछ इस तरह का होता :)    गोदियाल  'परचेत'   1964- मॉडल,  माँ-बाप  द्वारा   दिसम्बर माह में  उपार्जित करने की  एक ख़ास वजह शायद  मूल्यों में वर्षांत मिलने वाली  भारी छूट का लालच रहा होगा।  संतोषजनक चालू स्थिति में  मय समस्त बॉडी-पार्ट्स   नीलामी के लिए उपलब्ध ,   'पांच फुट सात   इंच की चेसिस '।  इच्छुक जन  कार्य-दिवस पर  स्वयं अथवा अपने  द्वारा  विधिवत प्राधिकृत  व्यक्ति के मार्फ़त,    इस सुअवसर का लाभ उठाने  और ह्रासित मुल्य पर बोली लगाने,  निम्न पते पर संपर्क करें -  " ऐज इज, व्हेर इज बेसिस"।।     

अनोखी समरूपता !

हिन्द-पाक को   लाख  अलग दिखलाने की कोशिश कर लो, किंतु  ये  देखिये  कि  कितनी समरूपता है बीच दोनों के।  गर फ़र्क ढूंढना  भी  चाहो  तो तुम्हें बस इतना सा मिलेगा कि  उनका "राजा" बिजली के तार खा गया, और अपना  'ए.  राजा ' टेलीफोनो के।।     

आश्चर्य !!

बहस-मुबाहिसा  ये है कि  ' पा ' जी ने  घटना के आठ दिन बाद  कुछ बोला है, गोले नहीं दागे  तो क्या , ये क्या कम है कि  महामात्य  ने मुहँ  खोला है।          कह दो जाकर  हर मतदाता  नए-पुराने वालों को,  बदहाली और बदइंतजामात  पर गुर्राने वालों को।    वतन की आबरू का  सरपरस्त बनाया खुद तुमने ,   शव से कफ़न और  सच से दामन चुराने वालों को।।  xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx परिवार सँवारना  ही  जीवन की रेल समझते थे जो, बन्धनों में बंधना ही   दिलों का मेल समझते थे जो,  पूर्व - प्रवेश परीक्षा में  असफल रहे कई ऐसे माँ-बाप,  नर्सरी में दाखिले को  बच्चों का खेल समझते थे जो।  

तोबा-तोबा !

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निराले तुम्हारे अंदाज  हर रंज-ओ-गम,  सिकवे-गिले में, शायद यही वजह है  जो वालिद ने तुम्हारे,  कैद करके रखा तुमको किले में।    ताज्जुब की बात है कि  फिर भी दिल तुम्हारा चोरी हो गया , मुझे  ऐसे हुआ मालूम कि  शक की वीनाः पर पुलिस ने  मेरे घर  छापा डाला इसी सिलसिले में।।   

स्वास्थ्य सम्बन्धी एक महत्वपूर्ण जानकारी !

सुप्रभात और आप सभी को  लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाये !  आज रविवार है और हर कोई फुर्सत के इन पलों को अपनी यथाशक्तिनुसार व्यतीत करने की सोच रहे होंगे। मैं भी ख़ास कुछ लिखने के मूढ़ में नहीं हूँ  आज। किन्तु मेरे में एक वंशानुगत बीमारी है,कि फ्री में दूसरों को सलाह देना, इसलिए मजबूरन यह नेक सलाह देने को पेट के अन्दर के कीड़े  मेरी इन्द्रियों पर पूरा दबाव बना रहे है। तो आज की स्वास्थ्य संबंधी एक नेक सलाह उन मरीजों के लिए जिनका ब्लड प्रेशर  हमेशा  लो ( निम्न रक्तचाप ) रहता है, जिनका  खून नहीं खौलता  है , उन्हें एक  रामबाण औषधि बता रहा हूँ  जो यकीन मानिए,  शत-प्रतिशत कारगर सिद्ध होगी;             आपको करना बस इतना है कि  अपने अख़बार वाले से बोलकर अपने घर में किसी अख़बार का उत्तरप्रदेश   संस्करण  विशेषकर पश्चमी उत्तरप्रदेश ( गाजियाबाद नौयेडा, ग्रेटर नौएडा, मेरठ, बागपत,बुलंदशर,मुरादाबाद, व...

कार्टून कुछ बोलता है- बहुआयामी प्रतिभा के धनी !

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दरिया-ऐ-इश्क

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दरिया-ऐ-इश्क, प्रीत  दर्शाने की, फरमाइश  अच्छी नही, दिल की बात लव पे लाने की, सिफारिश अच्छी नहीं।     मंजूर वो जो बे-गरज कहें निगाहें,गेसुओं की ओंट में, अंजुमन में आने की अर्ज, ये गुजारिश अच्छी नही । मजमा-ए-महफ़िल करें क्यों, प्रेम की पहचां उजागर , मुहब्बत की नजर,जज्बातों की नुमाइश अच्छी नहीं। दरमियां मुहब्बत के ये देखिये,भरोसा न टूटे कभी , यकीं दिलाने को ये रिश्तों की पैमाइश अच्छी नहीं। पैमानो में भरकर दर्द को, क्यों भला छलकायें  हम, मद भरी आँखों से बेमौसमी, हर बारिश अच्छी नहीं। 

रास आता नहीं हमको, ये आलम तन्हाइयों का।

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पीछा करें भी तो कहाँ तक भला,ये नयन परछाइयों का रास आता नहीं अब और हमको , आलम तन्हाइयों का। डरी-डरी सी बहने लगी है, हर बयार  मन की गली से ,  ख्वाब भी आते नहीं अब,खौफ  खाकर  रुसवाइयों का। हमें शुष्क दरिया समझ बैठे हैं, समंदर की चाह वाले,   सीपियों को भी इल्म नहीं,इस दिल की गहराइयों का। दौर -ए- पतझड़ सूखकर गिरने लगे हैं आशा  वरक़ ,          सहमा-सहमा है ये दिल दरख्त,  डर है पुरवाइयों का।   वरक़=पत्ते      मुरादें करने लगी प्रणय पत्थरों से मंगल सूप धारण,    कौन जाने,क्या पता कब बनेगा,योग शहनाइयों का।

सर्द अहसास !

जबाब देने  लगे जब तन, वो भी  साथ लिए  हुए  इक आहत मन,  सवालों के जबाब देते-देते, जिन्दगी भी  खुद इक  सवाल बनकर रह जाती है।    फर्क बस इतना है कि  लड़कपन में वालिद अक्सर   जीवन का मकसद पूछा करते थे  और बुढ़ापे में औलाद जीने का मकसद पूछती है। xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx दामन में पसरे हुए  खुश्क, बेवफा मौसम को जब हैरत से तकने लगते है  कुछ  उमंगों के फूल, कुछ अहसास कराती  है भूल,  और तब समझ में  आता है  कि क्यों तुम कहा करते थे, वफ़ा की दुनिया सितारों से  भी बहुत आगे है। तुम तोड़कर चले गए  तमाम दिल की सलाइयों  को , और जब  सर्द-अहसासों के खुश्क मौसम आए  , हम कोई हसीं ख्वाब न बुन पाए ।  

एक खोती की अभिलाषा !

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मुझे चाहिए इक  ऐसा खोता,  जब मैं चांहू तब उसे जोता। ढेंचू-ढेंचू करता वो दौड़ा आये, जब दूं समीप आने का न्योता।     मुझे चाहिए इक  ऐसा खोता.....   कूल रहे  हमेशा, जहां तक हो,  किसी बड़े स्कूल से स्नातक हो,  बोल न बोले कोई दिल चुभो ता,  मुझे चाहिए  इक  ऐसा खोता.....     ऋतु मुताबिक गाना गाना जाने, हर व्यंजन,पकवान पकाना जाने, कभी भी ऐन वक्त पे मिले न सोता,  मुझे चाहिए  इक  ऐसा खोता.....  

तिलिस्म !

चढ़े प्यार  की खुमारी, जब  मति जाए मारी ,  तशख़ीस  न हो  वक्त पर तो  लाईलाज है  ये  कम्वख्त  इश्क की बीमारी ।   तशख़ीस=निदान (diagnose)  संक्रामक है यह रोग, तेजी से पसारता है पांव , और मिले इसे जो पलकों की छाँव   तो  जाती नहीं फिर तारी , बढ़ा देती है दिल की बेकरारी, कम्वख्त  इश्क की बीमारी ।  है व्याधि लाइलाज , अनसुलझा है इसका राज, परहेज़ उत्तम और बचो उससे  जो सूरत कोई नजर आये प्यारी, वरना उलझा देगी तकदीर बेचारी , कम्वख्त  इश्क की बीमारी ।