यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

जबरदस्त प्रहार किया है आपने !!
ReplyDeleteप्रभावशाली ,
ReplyDeleteजारी रहें।
शुभकामना !!!
आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
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और ऊपर से गुण ये कि बंदर एकदम पालतू भी है जी
ReplyDeleteसुन्दर प्रस्तुति |
ReplyDeleteबढ़िया विषय |
शुभकामनायें ||
तीनो गुण एक ही व्यक्ति में,,,कमाल का व्यंग,,,,
ReplyDeleterecent post : जन-जन का सहयोग चाहिए...
बंदर जी की एक खासियत और भी है कि ये एक ही खानदान के परम पालतू भी हैं. बहुत सटीक.
ReplyDeleteरामराम
पाजी सानू नज़र नि आरेया ...
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