...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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वज़ह!
गर तुम न खरीददार होते, यकीन मानिए, टके-दो-टके में भला कौन बिकता? मुहब्बत बिकाऊ न है और न थी कभी, बस, निवेश गलत किया है तुमने, इसीलिए घर मे...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...

जबरदस्त प्रहार किया है आपने !!
ReplyDeleteप्रभावशाली ,
ReplyDeleteजारी रहें।
शुभकामना !!!
आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
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और ऊपर से गुण ये कि बंदर एकदम पालतू भी है जी
ReplyDeleteसुन्दर प्रस्तुति |
ReplyDeleteबढ़िया विषय |
शुभकामनायें ||
तीनो गुण एक ही व्यक्ति में,,,कमाल का व्यंग,,,,
ReplyDeleterecent post : जन-जन का सहयोग चाहिए...
बंदर जी की एक खासियत और भी है कि ये एक ही खानदान के परम पालतू भी हैं. बहुत सटीक.
ReplyDeleteरामराम
पाजी सानू नज़र नि आरेया ...
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