तिलिस्म !



चढ़े प्यार की खुमारी,
जब मति जाए मारी , 
तशख़ीस न हो वक्त पर
तो लाईलाज है  ये 
कम्वख्त इश्क की बीमारी ।  
तशख़ीस=निदान (diagnose) 

संक्रामक है यह रोग,
तेजी से पसारता है पांव ,
और मिले इसे जो पलकों की छाँव 
तो  जाती नहीं फिर तारी ,
बढ़ा देती है दिल की बेकरारी,
कम्वख्त इश्क की बीमारी । 

है व्याधि लाइलाज ,
अनसुलझा है इसका राज,
परहेज़ उत्तम और बचो उससे 
जो सूरत कोई नजर आये प्यारी,
वरना उलझा देगी तकदीर बेचारी ,
कम्वख्त इश्क की बीमारी ।    


Comments

  1. चलो अच्छा हुआ, बिछड़ गई हमसे वक्त से पहले,
    तुम्हारे लिए हमारे दिल में जो बसती बेकरारी थी..

    वाह गौदियाल साहब ... ये बेकरारी कम न करें ... उम्र के साथ इसकी जरूरत तो बढती जाती है ...

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  2. शायर परचेत को सलाम।
    बहुत बढ़िया कलाम।

    ReplyDelete
  3. जब चढ़ आये भाव,
    छोड़ चले डर दाँव।

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  4. बेहद खूबसूरत गज़ल ....

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