यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

बेहद सटीक... :)
ReplyDeleteवाह .. क्या बात है ...
ReplyDeleteछापा मारने की दिल उनका चोरी हो गया ...
चोरी गयी चीज मिली या नहीं..
ReplyDeleteक्षमा सहित -
ReplyDeleteइत्तिफाक से मिल गयी, नंगा झोरी होय ।
फोटो-कॉपी से मिला, यो ही छोरी होय ।
यो ही छोरी होय, रखे दिल-बड़ी तिजोरी ।
रही रोज अब धोय, पुलिस ने पकड़ी चोरी ।
यह अंधड़ घनघोर, झरे अब अश्रु आँख से ।
बसी कहाँ प्रियतमा, डरूं इस इत्तिफाक से ।।
@भारतीय नागरिक - Indian Citizen:
ReplyDeleteतलाश जारी है............ :)
नमस्ते जी
ReplyDeleteयथार्थ की अभिब्यक्ति बहुत ही अच्छी सटीक कबिता ने बयां किया है,
वाह, दिल आया भी तो किस पर।
ReplyDeleteवाह...क्या बात है
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