Posts

Showing posts from December, 2017
Image
ए दुनियांदारी है कि होती नहीं टस से मस , जिधर झांको निन्यानबे का ही फेर है, बस, तीन सौ पैंसठ दिन यूं ही चलती है जिन्दगी, आज बडा दिन है, छोड़ दो सारी कशमकश। मैंरी क्रिसमस !!

दिल्ली/एनसीआर, क्या चिकित्सा मर्ज का मूल मेदांता सरीखे अस्पताल नहीं ?

  चूँकि दिल्ली के मैक्स और हरियाणा  के  फोर्टिस अस्पताल का मुद्दा गरम है, इसलिए इस प्रसंग को उठाना जायज समझता हूँ। पिछले कुछ दशकों से अधिक मुनाफे की लालसा में देश के हर कोने में  निजी चिकित्सकों और चिकित्सालयों का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार जग-जाहिर हो चुका है। हालांकि यह बात १००% सत्य भी नहीं है क्योंकि  मैं ऐसे बहुत से निजी चिकित्सकों को भी जानता हूँ, जो न्यूनतम लागत पर नि:स्वार्थ भाव से आज भी जनता की सेवा कर रहे है।    जहां तक दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों की चिकित्सासंहिता की बात है, मुख्य बात पर आने से पहले आपको याद दिलाना चाहूंगा कि नब्बे के दशक मे  दिल्ली की, खासकर बाहरी दिल्ली, फरीदाबाद, गुडगांव, नोएडा और  गाजियाबाद में हर कस्बे में एक नर्सिंगहोम होता था।   जहां तब चिकित्सा व्यापार एक असंगठित क्षेत्र था, वहीँ  छोटे स्तर पर ही सही, किन्तु बाई-पास सर्जरी और अन्य बड़े ऑपरेशनों तक की सुविधा इन नर्सिंगहोमों में उपलब्ध होती थी।  नब्बे के दशक में ही दिल्ली के मथुरा रोड पर निजी क्षे...