लघु कथा:-'पराधीन सपनेहु सुख नाही।'
स्कूटर और उनकी पत्नी स्कूटी शहर के उत्तरी हिस्से में सरकारी आवास संस्था द्वारा निम्न आय वर्ग के लोगो के लिए ख़ासतौर पर निर्मित और बसाई गई एक कालोनी में पिछले एक दशक से रहते थे। उनकी कालोनी के ज्यादातर निवासी दिनभर दौड़-भागकर इधर से उधर बोझा ढ़ोने का काम करके अपनी रोजी चलाते थे। स्कूटर दम्पति समेत कालोनी के तमाम वाशिंदे यूं तो बहुत सुखी नहीं थे, किन्तु फिर भी दो जून को भरपेट मिल जाता था , बस यूं समझिये कि उसी में सुखी रहने की भरपूर कोशिश करते रहते थे। लेकिन पिछले एक साल से , जबसे उनके पड़ोस में उनके एक नए पड़ोसी, बाइक मियाँ और उनकी पत्नी लूना आकर रहने लगे थे, स्कूटर जी थोड़ा परेशान चल रहे थे। और उनकी परेशानी का सबब बने थे, खुद उनके ये नए छरहरे बदन, सुडौल कद-काठी एवं खुशमिजाज, दिल-फेंक बाइक मियाँ। जीवन की अधेड़ दहलीज पर पहुँच चुके तोंदू स्कूटर मियाँ को न जाने क्यों ऐसा लगता था कि उम्र में उनस...