Posts

Showing posts with the label Stories

लघु कथा:-'पराधीन सपनेहु सुख नाही।'

          स्कूटर और उनकी पत्नी स्कूटी शहर के उत्तरी हिस्से में सरकारी आवास संस्था  द्वारा निम्न आय वर्ग के लोगो के लिए ख़ासतौर पर निर्मित और बसाई गई एक कालोनी में पिछले एक दशक से रहते थे। उनकी कालोनी के ज्यादातर निवासी दिनभर दौड़-भागकर इधर से उधर बोझा ढ़ोने का काम करके अपनी रोजी चलाते थे। स्कूटर दम्पति समेत कालोनी के तमाम वाशिंदे यूं तो बहुत सुखी नहीं थे,  किन्तु फिर भी दो जून को  भरपेट मिल जाता था , बस यूं समझिये कि उसी में सुखी रहने की भरपूर कोशिश करते रहते थे। लेकिन पिछले एक साल से , जबसे उनके पड़ोस में उनके एक नए पड़ोसी, बाइक मियाँ और उनकी पत्नी लूना आकर रहने लगे थे,  स्कूटर जी थोड़ा परेशान चल रहे थे। और उनकी परेशानी का सबब बने थे, खुद  उनके ये नए छरहरे बदन, सुडौल कद-काठी एवं खुशमिजाज, दिल-फेंक बाइक मियाँ। जीवन  की अधेड़ दहलीज पर पहुँच चुके तोंदू स्कूटर मियाँ को न जाने क्यों ऐसा लगता था कि उम्र में उनस...

कहानी - भाग्य अपने हिस्से का !

Image
"सॉरी, गोंट टु गो, आई वेस्टेड सो मच आफ योर टाइम।" हल्की सी कराह खुद में समेटे ये भारी-भरकम स्वर जब कानो में पड़े तब जाकर यह अहसास हुआ कि साथ में कोई अजनबी बैठे हैं। मोटी, घनी और घुमावदार सफ़ेद मूछों से सुसज्जित उस रौबीले चेहरे पर एक नजर डालने के उपरान्त मैं कहना चाहता था, "प्लीज स्टे अ लिटिल लौंगर" किन्तु न जाने क्या सोचकर मैंने खुद को रोक लिया था।  डग धीरे-धीरे एक ख़ास दिशा में बढ़ाते, उम्र के तकरीबन सत्तर वसंत पार कर चुके उन रिटायर्ड ब्रिगेडियर साहब को मैं और मेरा परिवार खामोश अंदाज में तब तक निहारता रहा, जब तक वे सज्जन टिप्पन टॉप के ठीक सामने, विपरीत दिशा में पार्क अपनी हरे रंग की जोंगा जीप में नहीं बैठ गए थे।  और फिर उसे मोड़कर हमारे सामने  की सड़क से, अंग्रेजों के जमाने के उस गिरजाघर के लॉन में खेल रहे मेरे दोनों बच्चों की तरफ खिड़की से हाथ हिलाते हुए वहाँ से निकल नहीं गए थे। मैं और  मेरी धर्म-पत्नी यह देखकर  हैरान थे कि ड्राइविंग सीट पर बैठे उन ब्रिगेडियर साहब के बगल की सीट पर एक अधेड उम्र सं...

लघु कथा- आदत हाथ फैलाने की !

Image
दो-तीन दिन पहले मैंने यह लघु-कथा अपने आचलिक भाषा के ब्लॉग पर गढ़वाली में लिखी थी, आज उसका हिन्दी अनुवाद यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ ;  एक ब्राह्मण पुजारी के तौर पर अपना सांसारिक जीवन शुरू करने वाले उसके वृद्ध पिताजी    इलाके भर में  एक दिव्य-महात्मा  के तौर पर प्रसिद्द हो गए थे। इलाके के लोग यहाँ तक मानते थे कि अगर    वे  किसी को   कोई वरदान अथवा शाप दे दें तो वह शत-प्रतिशत सच निकलता था। मगर एक वो कहावत "चिराग तले अन्धेरा" भी उन पर बखूबी चरितार्थ होती थी, और उसकी वजह थी, पंडित जी का अपना इकलौता लड़का, निकम्मा, निठल्ला और आलसी।  बचपन से ही पता नहीं यह कैसी आदत उसने पकड़ ली थी कि चाहे कोई दोस्त हो, मास्टर जी हों, अथवा कोई रिश्तेदार हों, जहां मौक़ा मिला, उनके आगे पैसों के लिए हाथ फैला देता था।  पंडित जी उसकी इस आदत से बड़े दुखी थे। किन्तु उसकी इस आदत के लिए कुछ हद तक वे खुद भी जिम्मेदार थे क्योंकि पंडित जी अपने आदर्शों के भी पक्के थे। सिद्धता का गुण खुद...

मूर्खता और लालच !

Image
गत सप्ताह एक विवाह समारोह में सम्मिलित होने हेतु उत्तराखंड की यात्रा पर था । वहाँ एक  परिचित के मुख से सुनी एक पुरानी आंचलिक कहानी को यहाँ लिपिबद्ध कर रहा हूँ। संभव है कि कुछ लोग इस कहानी से पहले से वाकिफ हो फिर भी   उम्मीद करता हूँ कि कुछ पाठकगण, खासकर बच्चों को पसंद आयेगी । एक गाँव में एक निर्धन मगर बहुत ही चालाक किस्म का किसान रहता था । घर की परिस्थितियों के अनुरूप किसान की पत्नी खान-पान में भी मितव्ययता बरतने का भरसक प्रयास करती थी, लेकिन किसान को यह पसंद न था । फलस्वरूप उसने अपनी पत्नी से कहा कि आइन्दा वह जब भी भोजन पकाए  तो दो आदमियों का खाना अतिरिक्त बनाया करे, भले ही उस अतिरिक्त भोजन को उन्हें दू सरे वक्त में ही क्यों न खाना पड़े ।  एक दिन किसान लकड़ी लेने जंगल गया तो उसे वहाँ दो खरगोश के बच्चे मिल गए । वह उन्हें घर ले आया और उनका पालन-पोषण करने लगा । एक दिन वह अपने बैलों संग हल जोतने के लिए खेतों में गया था तो वह एक खरगोश भी साथ ले गया था । हल लगाते वक्त उसने उस खरगोश को हल के ठीक पीछे रस्सी से बांध दिया ।  ...

हतभाग्य सुश्री 2जी !

कई सालों के बाद अब 2जी स्पेक्ट्रम की हालिया   दोबारा आयोजित  नीलामी  निम्नलिखित कहानी के अनुरूप है: एक सुंदर लड़की थी  जिसने अपने माता पिता को खो दिया था।  उसके बाद वह अपने एक अभिभावक के साथ रहने लगी थी। जल्दी ही  वह लड़की शादी के योग्य हुई तो उसके भ्रष्ट संरक्षक ने उसके लिए एक उपयुक्त वर ढूढने  के बजाय उसे एक बूढ़े अमीर आदमी के हाथों बेच दिया,यानि कि  पैसे लेकर उसकी शादी उस बूढ़े अमीर के साथ कर दी।  हर किसी ने उसके इस कदम की यह कहते हुए कटु आलोचना की कि उसे उस लड़की के लिए एक उपयुक्त वर की तलाश करनी चाहिए थी क्योंकि वह लड़की ख़ूबसूरत थी, उससे शादी के लिए एक से बढ़कर एक अच्छे मैच, कई सुन्दर युवा स्नातक वर प्रस्ताव लेकर आगे आ रहे थे। वह भ्रष्ट अभिभावक कई वर्षों तक जब यह आलोचना सहन करने में असमर्थ रहा और जब लड़की प्रौढ  हो गई तो उसने लड़की से  उसके वर्तमान बूढ़े पति को तलाक देने को ...

लघु कथा- चिराग तले...

इशु, बेटा गुप्ता जी की दूकान से बड़े वाले चार ड्राइंग पेपर और ले आ..........प्लीज! अपनी दस बर्षीय बेटी इशा को आवाज लगाते हुए रमेश बोला। आज छुट्टी का दिन था और रमेश सुबह-सबेरे ही उठकर भोजन कक्ष में मौजूद खाने की बड़ी मेज पर चार-पांच सफ़ेद आर्ट पेपरों और इशा के स्कूल-बस्ते से चित्रकला का सामान निकालकर अपने सपनो के घर का नक्शा बनाने में मशगूल था। अपने ही कल्पना जगत में खोया वह यह सज्ञान लेना भी भूल गया कि सबिता ने उसे उसी टेबल पर नाश्ता भी परोसा था और उसे वह कब का चट कर गया था। उसकी यह तंद्रा तब टूटी जब करीब ग्यारह बजे सबिता उसके लिए दूसरी बार चाय बनाकर लाई और रमेश ने सबिता से सवाल किया कि आज नाश्ता खिलाने का मूड नहीं है क्या, तो तब सबिता बोली, पागल हो गए हो क्या, तुमने साढ़े आठ बजे के करीब जो खाया था वो क्या नाश्ता नहीं था? यूं तो जब से प्लॉट की रजिस्ट्री घर में आई थी, सबिता भी सोते-जागते अपने मानस पटल पर कई स्वप्न-महल खड़े कर चुकी थी। घर के कामों से फुर्सत मिलते ही आलमारी के लॉकर में रखी रजिस्ट्री को वह भी मेज पर फैलाकर उस रजिस्ट्री संग लगे प्लाट के मानचित्र को उल्टा-पुल्टाकर, भिन्...

स्टेनोग्राफर बनाम....

Image
एक आपात बुलावा आ जाने की वजह से ह्रदय रोग विशेषज्ञ और बाईपास सर्जन डाक्टर जैन एवं उनके असिस्टेंट डाक्टर त्रिवेदी सर्जरी के लिए ऑपरेशन टेबिल पर रखे मरीज से सम्बंधित   कुछ हिदायते, जेनी और जूली को देकर और उसे उनकी देख-रेख में छोड़कर तुरंत बगल वाले ऑपरेशन थियेटर में चले गए थे। इधर टेबिल पर बेहोश पड़े मरीज के सर्जरी के लिए फाड़े गए सीने के उसपार गाढा बैंगनी रंग लिए तह की सी मुद्रा में पड़े दिख रहे दिल में जब भी कोई हल्की सी कम्पन होती तो उसे गौर से देख रही जेनी, उसके बगल में खड़ी जूली की तरफ सिर घुमाकर हल्का सा मुस्कुरा भर देती थी। फिर कभी वह टेबिल पर रखी कास्त्रोविएजो कैंची को हाथ में लेकर उससे मरीज के दिल की उन तहों तो टटोलने लगती और फिर रुआंसी सी शक्ल बनाकर जूली से कहती कि माँ कहती थी कि मेरे लिए प्यार को इस निर्मम, कुकर्मी इंसान ने अपने दिल में छुपाकर रखा है, मैंने तो इसके दिल को सारा टटोल लिया, मुझे तो कहीं भी नजर नहीं आया। जूली ने मास्क से आधे ढके अपने चेहरे पर मुस्कान बिखेरते हुए चुटकी लेकर कहा; अरी, तू तो उसके दिल की सिर्फ बाहर की तहें ही टटोल रही है, क्या...

शारदा !

कृष्णा बाथरूम से नहाकर ज्यों ही बाहर अपने कमरे में पहुंचा और उसने तौलिये से अपने गीले बालों को हौले-हौले रगड़ना शुरू किया, तभी किचन से स्वाति ने भी कमरे में प्रवेश किया और बोली; सुनो जी, आज गणतंत्र दिवस की छुट्टी है, मार्केट बंद रहेगा। तुम भी फ्री हो, क्यों न आज हम लोग माँ को मिलने चलें, हमारी शादी के बाद जबसे बेचारी जेल गई है, हम लोग एक बार भी उनकी कुशल-क्षेम पूछने नहीं गए। एक बार राहुल को तो उनसे मिला देते, वह भी दो-ढाई साल का हो गया है, उसने भी अभी तक अपनी दादी को नहीं देखा। स्वाति की इस बात पर एक बार तो कृष्णा भड़क ही गया, और स्वाति की तरफ देखते हुए गुस्सैल अंदाज में बोला, यार मैं तुम्हे कितनी बार बता चुका कि मुझे नहीं मिलना किसी माँ-वां से, मेरी माँ पांच साल पहले मर चुकी, अब मेरी कोई माँ-वां नहीं है। कृष्णा की बात सुनकर, थोड़ा रूककर स्वाति ने अपने दोनों हाथों से उसका बाजू पकड़ते हुए उसे पुचकारते हुए बोली "यार, वो तुम्हारी माँ है, तुम कैसे निष्ठुर बेटे हो। एक बार भी यह नहीं सोचते कि बिना उनकी बात सुने ही हमलोगो ने उनसे इसतरह किनारा कर लिया, कोई तो बात रही होगी जो तुम्हारी माँ ने...