परिंदों ने घर बसाया, बच्चों संग फुर हुए,
निशानियां बसावट की मैं देख पाया था,
अपने छोटे से आशियां में उनके लिए,
जो मैंने भी इक छोटा सा नीड़ बनाया था।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
परिंदों ने घर बसाया, बच्चों संग फुर हुए, निशानियां बसावट की मैं देख पाया था, अपने छोटे से आशियां में उनके लिए, जो मैंने भी इक छोटा सा नीड़ ब...
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