Friday, April 10, 2026

कुदरत













परिंदों ने घर बसाया, बच्चों संग फुर हुए,

निशानियां बसावट की मैं देख पाया था,

अपने छोटे से आशियां में उनके लिए,

जो मैंने भी इक छोटा सा नीड़ बनाया था।




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ख़्याल !

दिल मे न गिला रखते, जुबां पर न  सिकवा आता, गर दृष्टा ही सही होती, दृष्टिकोण ही बदल जाता, सब्र से उठा लेते, उनकी हर इक  तशद्दुद ' परचेत...