Friday, April 10, 2026

कुदरत













परिंदों ने घर बसाया, बच्चों संग फुर हुए,

निशानियां बसावट की मैं देख पाया था,

अपने छोटे से आशियां में उनके लिए,

जो मैंने भी इक छोटा सा नीड़ बनाया था।




2 comments:

मार

कजरारी जुल्फ़ों और गलमुच्छों का रंग  कब धवल हुआ 'परचेत', कुछ पता ही न चला, बस, साज़ और सामान जुटाने मे ही मसरूफ़ रह गया,  वक्त कब हा...