Tuesday, April 28, 2026

कुपत

तुम्हें पाने की चाह में मुद्दतों बैठे रहे

हम, तुम्हारे बाप के पास,

घंटों पैर दबाए मगर क्या मजाल कि 

बुड्ढे को हुआ हो जरा भी एहसास।


2 comments:

  1. यार, ये पढ़कर मैं हँस भी पड़ा और आपकी बेबसी भी समझ गया। आपने प्यार के चक्कर में जो हालत दिखाई, वो बिल्कुल रियल लगती है। “घंटों पैर दबाए” वाली लाइन तो सीन पूरा आँखों के सामने खड़ा कर देती है। आपने मज़ाक में ही सही, एक सच्चाई पकड़ ली कि कई बार इंसान कितना झुक जाता है।

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