Tuesday, April 28, 2026

कुपत

तुम्हें पाने की चाह में मुद्दतों बैठे रहे

हम, तुम्हारे बाप के पास,

घंटों पैर दबाए मगर क्या मजाल कि 

बुड्ढे को हुआ हो जरा भी एहसास।


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कुपत

तुम्हें पाने की चाह में मुद्दतों बैठे रहे हम, तुम्हारे बाप के पास, घंटों पैर दबाए मगर क्या मजाल कि  बुड्ढे को हुआ हो जरा भी एहसास।