Tuesday, June 9, 2026

ख़्याल

गर दृष्टा ही सही होती, दृष्टिकोण ही बदल जाता,

दिल मे न गिला रखते, जुबां पर न  सिकवा आता,

सब्र से उठा लेते, उनकी हर इक तशद्दुद 'परचेत',

कमबख़्त ऐ वक्त तू जो अगर, वक्त पर आ जाता।


तशद्दुद=ज़ुल्म 



ख़्याल

गर दृष्टा ही सही होती, दृष्टिकोण ही बदल जाता, दिल मे न गिला रखते, जुबां पर न  सिकवा आता, सब्र से उठा लेते, उनकी हर इक  तशद्दुद ' परचेत...