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Showing posts from February, 2026

दरकार नहीं

मैं  अभी सो रहा हूं, मर्जी के हिसाब से,  मर्जी के हिसाब से मुझे जागना है, तुम मत रुको मेरे लिए, ऐ ज़िन्दगी, भाग लो, जितनी तेजी से तुम्हें भागना है।

लुभावना

सफर मे धूप तो बहुत होगी, सूरज को ढक सको तो चलो,  एम्बूलैंस लेकर जा रही है रोगी,  राह उसकी रोक सको तो चलो।

इल्तज़ा

  मोहब्बत मे, आंखों मे भर आए आंसुओं को गिरने न देना 'परचेत', क्योंकि प्यार के आंसू ही रूह की खुराक होते हैं।

वाजिब सवाल !

सवाल ये नहीं है कि जवानी में हम क्यों जीने मरने की कसमें खाते हैं, सवाल ये है कि साठ के बाद ही क्यों 'परचेत',दर्द भरे गीत पसंद आते हैं।

वाहियात

आज उन्होंने जैसे मुझे,  पानी पी-पीकर के कोसा, इंसानियत से 'परचेत',  अब उठ गया है भरोसा।

दुविधा

इश्क़ कोई पोंछा नहीं है, सिखा गई आज काम वाली बाई, किधर जाऊं समझ नहीं आता, आगे कुआं है और पीछे खाई।

पैगाम

इस जिंदगी का फलसफा बस, इतना सा रहा 'परचेत',  मुकाम पर हम खुद को लानत-मलामत हजार देते हैं, संदेश उसतक पहूंचा देना, ऐ तख्त पर लटकाने वालों,  चलो, कुछ यूं करते हैं अब जिंदगी, तुझको गुज़ार देते हैं।

हकीकत

बेवफा क्या हुआ, कतार में खड़े हैं कुशलक्षेम पूछने वाले, जब बावफ़ा था 'परचेत'  तो गली का कुत्ता भी  नहीं पूछता था।

संस्कृत सीखिए

  अपने मुहल्ले में जरा सा सोबर दीखिए ओर संस्कृत बोलना सीखिए, खुद ही पूरी संस्कृत मत खाइए, थोड़ा बीवी को भी सिखाइए। जब झगड़े का मूड़ हो तो संस्कृत में ही लड़ना, जमकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप मढ़ना, झगड़ा कोई सुन रहा होगा, मन में न खल रहा होगा, पड़ोसियों को लगे कि घर में हवन-पूजन चल रहा होगा।

ऐ जिंदगी!

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अब और कहां तक  होगी इससे भी बदसूरत ज़्यादा, जिंदगी, तू जिंदा कम नजर आती है, मूरत ज्यादा।

पश्चाताप

अपने जो भी कहने को थे, सब अजनबी हुए, और खामोशियां बन गई हमारी जीवन साथी, क्या नहीं त्यागा था उनके लिए हमने 'परचेत', हम-सफ़र तो थे किंतु, उनसे हम-नवाई ना थी।

ओ रे पिया, मैं तुम्हारी

अपना तन-मन लुटा के हारी, ओ रे पिया, मैं तुम्हारी, आगोश तुम्हारे, मेरा सुलभ लगे मन, चाहे तन हो कितना ही भारी, ओ रे पिया, मैं तुम्हारी। संबंधों के तौर-तरीके मैं ना जानू, और बनावटीपन मैं ना मानू, या फिर कह लो दुनियादारी, अब रह नहीं सकती मैं कुंवारी,  ओ रे पिया, मैं तुम्हारी। कोमल हूं पर कमजोर नहीं हूं, सहमी-सहमी भोर नहीं  हूं, हर पल साथ खड़े हो जब तुम, कहके दिखाए कोई मुझे अबला नारी,  ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।

कोप

शरीक हुए थे जो कल के  कवि सम्मेलन में, वो सब के सब, एक ही थाली के चट्टे-बट्टे थे, एक से बढ़के एक पैदाइशी चमचे, तलवेचाट, बस,यही कहूंगा कि सबके सब उल्लू के पठ्ठे थे।🤣

तहकिकात अभी जारी रहेगी

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तहक़ीक़ात अभी जारी है

रिश्तों की खाइयों को पाटिये कि अब और न बढ़ें, दिलों के सहरा में नजर आ रही दरार बहुत भारी है, अगम्य राह, सत्य का पथ इतना दुर्गम कैसे हो गया, बाधित क्यों है आवाजाही,  तहक़ीक़ात अभी जारी है।‌ सदचित विभ्रम है और कानून  का कोई खौफ नहीं,  राष्ट्र भयभीत किया जा रहा, बिखरने की तैयारी है,  समृद्धि के पथ पर पता नहीं यह कौन सी दुश्वारी है,  संयम पांवों तले क्यों आया,  तहक़ीक़ात अभी जारी है।

दिल की बात

हमने भरोसा अभी भी कायम रखा है जीने मे, मगर, ऐ 'परचेत',यह दर्द असहनीय है सीने में। बड़े ही बुजदिल निकले ये सब, दिल दुखाने वाले, हमने तो प्यासे को भी पानी पिलाया था, मदीने में।।

नादानी

पता नहीं किसको ढूंढते रहे थे हम,  सबसे पूछा, डाकिया,धोबी,खलासी,  सबके सब फ़लसफ़े,इक-इककर खफ़े, लिए घुमते रहे बनाकर सूरत रुआँसी,  उम्र गुजरी,तबअहसास हुआ 'परचेत',  जिंदगी घर में थी, हमने मौत तलाशी।

इश्क़-ए-सर्दी

मांग रही थी वो आज मुझसे  मेरे प्यार का हलफनामा, मौर्निग वाक पर जाती है जो पहनकर, रोज मेरा ही गर्म पजामा।

तमन्ना

तुम्हारे ओठों से चिपककर सांसों के सहारे, तुमपर ही समर्पित हो जाता, ऐ काश कि अगर 'परचेत' !  मैं तुम्हारे  सान्निध्य की कोई  बांसुरी होता।

स्वीकारोक्ति

हिम्मत ही नहीं रही जब, दिखाने को कुछ नया करके, फायदा ही क्या है 'परचेत', तब अफसानें बयां करके।

Imagination

While landing at our courtyard,  A mysterious bumblebee  is humming, It looks, at our door,  a treasure trove of happiness  is coming.

नासमझ

मुहब्बत के खातिर तुम्हारी हर बगावत की, हमेशा ही अगुवाई करता, फक़त ख्वाबों में ही मुहब्बत की दुहाई दोगे तो 'परचेत', अंजाम यही होगा।