अपने जो भी कहने को थे, सब अजनबी हुए,
और खामोशियां बन गई हमारी जीवन साथी,
क्या नहीं त्यागा था उनके लिए हमने 'परचेत',
हम-सफ़र तो थे किंतु, उनसे हम-नवाई ना थी।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
तुझे न पा सकने का मुझे मलाल तो था, क्यों न पा सका, दिल मे ये सवाल तो था, न पा सकने की चाहे वजह कोई भी रही हो, वो पल था,दिन था,महिना था औ...
सुंदर
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