रातों के हर पहर-दोपहर,
जब भी मैं करवट बदलूं,
बदली हुई हर करवट पर,
कसम से आहें भरता हूं ,
उम्र पार कर चुका प्रेम की वरना,
कह देता कि मैं तुमपर मरता हूं ,
मत पूछो, ये नशा कौन सा करता हूं,
सच में, मैं तुम्हें बतानें से डरता हूं।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
रात गहरी बहुत है मगर, यकीं रखो, हम सोएंगे नहीं। तूम रुलाने की जितनी भी कोशिश कर लो, रोएंगे नहीं, बेदना के पार्क मे सन्नाटे संग खामोशी भ...
सुंदर
ReplyDelete🙏🤣
ReplyDeleteयार, ये लाइन्स दिल की हालत साफ दिखाती हैं। आपने बिना ज्यादा शब्दों के गहरी फीलिंग पकड़ ली है। मुझे यह बात बहुत असली लगी कि आप प्यार छुपाने की बात करते हो, क्योंकि कई बार लोग सच में ऐसा ही महसूस करते हैं। हर करवट पर याद आना और फिर भी खुलकर न कह पाना, यही तो असली कशमकश है।
ReplyDeleteNice Post.
ReplyDeleteLakshmi Ji Ki Aarti