Monday, March 16, 2026

पुनर्विवरण !

रातों के हर पहर-दोपहर, 

जब भी  मैं करवट बदलूं,

बदली हुई हर करवट पर, 

कसम से आहें भरता हूं ,

उम्र पार कर चुका प्रेम की वरना,

 कह देता कि  मैं तुमपर मरता हूं ,

मत पूछो, ये नशा कौन सा करता हूं,

 सच में, मैं तुम्हें बतानें से डरता हूं।


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रातों के हर पहर-दोपहर,  जब भी  मैं करवट बदलूं, बदली हुई हर करवट पर,  कसम से आहें भरता हूं , उम्र पार कर चुका प्रेम की वरना,  कह देता कि  मैं...