Monday, March 9, 2026

सलाह

कह रहा हूं मैं तुमसे, 

ऐ बेस्वाद, बेसुरे भड़वे,

जुबां पे थोड़ी मीठास घोल,

मत बोल इतने भी बोल कडुए।


तू शिद्दत रख और  समर्पण कर,

मत पड़ फरेब में जिस्मानी शाम की,

रूहानी एहसास खुदा की इबादत ,

 लिखदे तू जाकर अपने नाम की।


1 comment:

सलाह!

मत दिया कर दोष तू हमको  दरारों में झांकने का , ऐ दोस्त! तेरी नादानियों का खामियाजा, भला ये, तमाम जमाना क्यों भुगते?