Monday, March 9, 2026

सलाह

कह रहा हूं मैं तुमसे, 

ऐ बेस्वाद, बेसुरे भड़वे,

जुबां पे थोड़ी मीठास घोल,

मत बोल इतने भी बोल कडुए।


तू शिद्दत रख और  समर्पण कर,

मत पड़ फरेब में जिस्मानी शाम की,

रूहानी एहसास खुदा की इबादत ,

 लिखदे तू जाकर अपने नाम की।


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कश्मकश

खुबसूरत सपने हमने भी सजाए थे, क्योंकि हम भी कभी फितरत वाले थे, पूरे न हुए वो अलग बात है, 'परचेत', मगर ख्वाब तो हमनें भी बहुत पाले थे...