कह रहा हूं मैं तुमसे,
ऐ बेस्वाद, बेसुरे भड़वे,
जुबां पे थोड़ी मीठास घोल,
मत बोल इतने भी बोल कडुए।
तू शिद्दत रख और समर्पण कर,
मत पड़ फरेब में जिस्मानी शाम की,
रूहानी एहसास खुदा की इबादत ,
लिखदे तू जाकर अपने नाम की।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
तूफान, नदियां समंदर पे तू न इस तरह हमसे सवाल कर, डूबती हुई कई कश्तियां हम भी लाए हैं भंवर से निकाल कर। xxxxxxxxxxxxxxx छुपा लो जितना छुपान...
वाह
ReplyDelete