Thursday, March 12, 2026

वाजिब बात

रूठ जाते हैं मुझसे मेरे अपने ही और 

मुझको मनाने मे जरा भी रुचि नहीं,

दिलचस्प हों भी अगर मुहब्बत की राहें,

क्या फायदा, जब दिल मे ही शुचि नहीं?

 

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चटोरों की....

मैंने ख्वाब देखा था, ख्वाहिश अधूरी रही, चाटने वाले चाट गए, प्लेट साफ पूरी रही।