रूठ जाते हैं मुझसे मेरे अपने ही और
मुझको मनाने मे जरा भी रुचि नहीं,
दिलचस्प हों भी अगर मुहब्बत की राहें,
क्या फायदा, जब दिल मे ही शुचि नहीं?
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
रूठ जाते हैं मुझसे मेरे अपने ही और मुझको मनाने मे जरा भी रुचि नहीं, दिलचस्प हों भी अगर मुहब्बत की राहें, क्या फायदा, जब दिल मे ही शुचि नहीं...
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