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Showing posts from July, 2011

वाम-इस्लाम और समोसा कूटनीति !

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अज्ञानता और कमीनेपन की पराकास्ठा तब अपनी सारी हदे तोड़ देती है, जब मानव समाज में नगण्य कर्मावलम्बी परजीवी प्राणी क्रूरता, धृष्टता, झूठ और छल-कपट के बल पर अपनी आजीविका चलाने हेतु अज्ञान और अचिंतन के अन्धकार से भ्रमित निर्धन, शोषित और बौद्धिक कंगाल वर्ग के समक्ष खुद को उसका हितैषी और ठेकेदार प्रदर्शित कर, भय एवं ईश्वर के नाम से दिग्भ्रमित करने हेतु नए- नए तरीके खोजता है अभी हाल में कहीं पर एक खबर पढ़ रहा था कि अकाल और भुखमरी से ग्रस्त सोमालिया के इस्लामिक जिहादियों, जिनको कि समुद्री डाकूओ (पाइरेट्स ) के नाम से अधिक जाना जाता है,और जिनमे से अल-कायदा से जुडा हुआ एक प्रमुख गुट है, अल-सबाब, जिसने सोमालिया में अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगो को गली-मुहल्लों में घूम-घूमकर लाउडस्पीकरों पर यह हिदायत दी है कि वे आगे से समोसा न खाएं, क्योंकि समोसा पश्चमी ईसाइयत की त्रिमूर्ति (Trinity - The Christian doctrine of the trinity defines God as three divine persons in one god ) का द्योतक है (जैसा कि आपको भी विदित होगा कि समोसा तिकोना होता है ), और ये खुदा के बन्दे तो सिर्फ एक ही अल्ला...

भ्रष्ट-तंत्र की नौ-टंकियों पर टिकी पुण्य-भूमि की बुनियाद !

लालच और भोग-विलासिता की दौड़ में अंधे होकर, मानवीय मूल्यों की परख और पहचान तो खैर हम लोग सदियों पहले ही खो चुके थे, कितुं अपने सांस्कृतिक परिवेश को भी पश्चिमी चकाचौंध और बनावटी श्रृंगार के आगे फीका करके आज जो भयावह स्थिति हमने खुद के लिए पैदा कर दी है, मैं समझता हूँ कि शायद यह उन काल और परिस्थितियों से ज्यादा भिन्न नहीं होगी, जब अतीत में यह देश गुलामी की जंजीरों को को ग्रहण करने की देहलीज पर खडा रहा होगा! आज जिस तरह भ्रष्टाचार की देवी देश के हर कोने से हमारे आगे सुरसा राक्षशी की तरह मुह बाए खड़ी है, वह हमारे लिए नितांत एक चिंता का विषय होना चाहिए ! अधर्मता,चाटुकारिता,नीचता, दुष्टता, क्षुद्रता चटोरापन, हरामीपन, कमीनापन और छिछोरेपन की ये नौ-टंकियां ..... कहने सुनने और देखने में भले ही घिनौनी ही सही, मगर, दुर्भाग्यवश आज ये वो आदर्श स्तम्भ बन गए है, जिन पर हमारे इस भारत देश की मजबूत नीव टिकी होने का हम दावा करते है ! निज-स्वार्थ ने हमें इस कदर अंधा बना दिया है कि हम अच्छे और बुरे का भेद सिर्फ अपनी आकांक्षाओं और आवश्यकताओं की पूर्ति तक ही देख पाते है, उससे आगे नहीं ! देश के प्रति हमारे क्य...

हम और वो !

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कुछ लिखूंगा नहीं, क्योंकि फ़ायदा नहीं ! फ़ायदा इसलिए नहीं कि जो इसतरह की नीच और घृणित मानसिकता के लोग होते है, वे न तो ब्लॉग लिखते है और नही पढने में रूचि रखते है ! हाँ, इतना जरूर लिखूंगा कि बिना जाने, जांचे, और किन्ही ठोस निष्कर्षों पर पहुंचे किसी को दोषी मत ठहराइए ! ऐसे घृणित कृत्यों को करने वाले का कोई धर्म नहीं होता ! दोषारोपण करने से पहले खुद के गिरेबान में झांकना समझदारी कहलाती है ! किसी के ख़ास वर्ग को निशाना बनाने की जब हम कोशिश करते है तो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि उनमे और हममे ख़ास फर्क नहीं है ! फर्क सिर्फ इतना है कि वे पेड़ को काट डालते है, और हम जड़े खोदते है ! अभी उत्तरप्रदेश में हुई रेल दुर्घटना के बाद का दृश्य हर किसी ने नहीं देखा होगा, जैसे कि आरोप लगे कि पुलिस वाले बचाव कार्यों की बजाये घायलों और मृतकों के बटुवे और जेबे टटोलने में ज्यादा इंटेरेस्टेड थे ! तो वो हमारे ही भाई-बंद है, और उनका यह काम इन ब्लोस्टों से अधिक घृणित कृत्य भी ! यहाँ दो चित्र लगा रहा हूँ , एक अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के सौतेले भाई वली करजई के हत्यारे का है जिसे अफगानियों ने चौराहे पर लटका दिया और...

"इनक्रेडिबल इंडिया" !

"इनक्रेडिबल इंडिया" (अतुल्य भारत), हमारे पर्यटन विभाग का यह पर्यटन संवर्धन नारा ऐसा नहीं कि देशभर में कहीं फिट न बैठता हो ! नि:संदेह हाल के दशकों में कुछ तथ्यों में बदलाव जरूर आया है, मगर बहुत से मायनों में अविश्वसनीय भारत के वे पुराने तथ्य आज भी बहुत सटीक है! भारतीयों की यह अपार विलक्षण अविश्वसनीयता देश के हर कोने में कदम-कदम पर मौजूद रहकर पथिक को अपने होने का अहसास कराने से हरगिज नहीं चूकती! इस देश मे ऐसा बहुत कुछ है, जो वाकई अविश्वसनीय है ! हाल में जो रेल हादसे हुए और अनेकों निर्दोष जाने गई, वे भी इसी अविश्वसनीयता के आधारबिन्दु है ! भारतीय रेल के ऐंसे ही एक बहुत ही मामूली मगर जटिल ( हमारे राजनितिज्ञो और अफसरशाहों के नजरिये से) पहलू ने मेरा ध्यान तब अपनी ओर आकर्षित किया, जब हाल ही में मुझे रात को एक एक्सप्रेस ट्रेन से यात्रा करने का मौक़ा मिला! मुझे ट्रेन में सफ़र करते वक्त नींद नहीं आती और मैं अपनी बर्थ पर मूक लेटा-लेटा ट्रेन के पहियों से निकलता मधुर संगीत सुनने में व्यस्त था कि मेरे सामने की बर्थ पर सोये एक सज्जन जागे और अँधेरे में उन्होंने बाहर कुछ देखने की कोशिश की और...

कार्टून कुछ बोलता है -मंदिरों के खजानों में सरकारी सेंध !

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