वाम-इस्लाम और समोसा कूटनीति !
अज्ञानता और कमीनेपन की पराकास्ठा तब अपनी सारी हदे तोड़ देती है, जब मानव समाज में नगण्य कर्मावलम्बी परजीवी प्राणी क्रूरता, धृष्टता, झूठ और छल-कपट के बल पर अपनी आजीविका चलाने हेतु अज्ञान और अचिंतन के अन्धकार से भ्रमित निर्धन, शोषित और बौद्धिक कंगाल वर्ग के समक्ष खुद को उसका हितैषी और ठेकेदार प्रदर्शित कर, भय एवं ईश्वर के नाम से दिग्भ्रमित करने हेतु नए- नए तरीके खोजता है अभी हाल में कहीं पर एक खबर पढ़ रहा था कि अकाल और भुखमरी से ग्रस्त सोमालिया के इस्लामिक जिहादियों, जिनको कि समुद्री डाकूओ (पाइरेट्स ) के नाम से अधिक जाना जाता है,और जिनमे से अल-कायदा से जुडा हुआ एक प्रमुख गुट है, अल-सबाब, जिसने सोमालिया में अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगो को गली-मुहल्लों में घूम-घूमकर लाउडस्पीकरों पर यह हिदायत दी है कि वे आगे से समोसा न खाएं, क्योंकि समोसा पश्चमी ईसाइयत की त्रिमूर्ति (Trinity - The Christian doctrine of the trinity defines God as three divine persons in one god ) का द्योतक है (जैसा कि आपको भी विदित होगा कि समोसा तिकोना होता है ), और ये खुदा के बन्दे तो सिर्फ एक ही अल्ला...