हाँ, इनकी जय हो !
इन्होने ऊँच-नीच के अहसास को, पिछले बासठ सालो से, हर हिन्दुस्तानी के दिल में आरक्षण से जगाये रखा, इसलिए इनकी जय हो ! इन्होने जाति-धर्म, क्षेत्र के हास को पिछले बासठ सालो से, छद्म-निरपेक्षता के अंगारों पर, समाज में सुलगाये रखा, इसलिए इनकी जय हो ! इन्होने गरीबी के उपहास को पिछले बासठ सालो से, अमीरो की जुबान में , तरतीब से सजाये रखा, इसलिए इनकी जय हो ! इन्होने गुलामी के दास को पिछले बासठ सालो से, हर छोटे-बड़े नेता के घर में दामाद बनाके बिठाये रखा, इसलिए इनकी जय हो ! इन्होने अपने भोग-विलास को पिछले बासठ सालो से, चंदे और दलाली की विसात पर बार और कोठो में पनपाये रखा, इसलिए इनकी जय हो !