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Showing posts from March, 2011

जहां भगवान् ही अपना शतक न बना पा रहा हो...!

जहां तक मैं समझता हूँ, भारत और पाकिस्तान का शायद ही कोई ऐसा क्रिकेटप्रेमी होगा जो यह न जानता हो कि खेल खेल होता है, और दो टीमे जब आपस मे खेलेंगी तो अवश्य ही एक जीतेगी और एक हारेगी ! अधिक से अधिक यही हो सकता है कि मैच दोनों टीमों के बीच बराबरी पर छूटे (टाई रहे) ! और शायद बहुत से लोग मेरी इस बात से भी इत्तेफाक रखते हो कि किसी भी खेल में इससे अधिक की उम्मीद रखना शायद मूर्खता ही कहलायेगी ! लेकिन यह भी एक बिडम्बना ही है कि हम लोग कहाँ इतने में ही संतुष्ट होने वाले ठहरे , अत: हमने ढूढ़ निकाली एक नई दवा " क्रिकेट डिप्लोमेसी" ! दोनों ही पक्षों, भारत और पाकिस्तान में से कोई भी यह मानने को राजी नहीं कि यह दोनों देशों की टीमों के बीच सिर्फ एक एक दिवसीय खेल है और उनकी टीम इस खेल में सिर्फ और सिर्फ अच्छा खेले, बल्कि वे चाहते है कि बस उनकी ही टीम जीत हासिल करे ताकि वे दूसरे पक्ष को नीचा दिखा सकें ! जहाँ तक पाकिस्तान की टीम का सवाल है, मैं समझता हूँ कि अगर हम इस खेल को केवल खेल के ही दायरे में देखने की कोशिश करें, और हाल के वर्षों में उनके खिलाड़ियों के कारनामों की वजह से उनकी परफोर्मेंस का आ...

कार्टून कुछ बोलता है-खिलाडियों का उत्साहवर्धन !

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कुरुर पुनरावृति !

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शर्मो -हया गायब हुई, आंख,नाक,गालों से, गौरवान्वित हो रहा, अब देश घोटालो से । विदुर ने संभाला है, अभिनय शकुनि का, हस्तिनापुर परेशां है, गांधारी की चालों से ॥ द्यूत क्रीड़ा चल रही, घर,दरवार,जेल मे, पांसे खुद जुट गए, शह-मात के खेल मे । इन्द्र-प्रस्थ पटा पडा, कुटिल दलालों से, हस्तिनापुर परेशां है, गांधारी की चालों से ॥ एकलव्य का अंगूठा, बहुमूल्य हो गया, सुदूर दक्षिण का इक  रंक-ए- राजा तुल्य हो गया । यक्ष भी हैरान है, करुणाजनित जालों से, हस्तिनापुर परेशां है, गांधारी की चालों से ॥ गरीब-प्रजा से भी, लगान जुटाने के बाद, सफ़ाई के नाम पे, अरबों लुटाने के बाद । गंगा-जमुना मजबूर है, बहने को नालों से, हस्तिनापुर परेशां है, गांधारी की चालों से ॥ युवराज दुर्योधन है, ताक मे सिंहासन के, चीरहरण को आतुर है, हाथ दू:शासन के । बेइज्जत हो रही द्रोपदी, खाप-चौपालों से, हस्तिनापुर परेशां है, गांधारी की चालों से ॥ कहीं ढूढना न फ़िर, अर्जुन-कान्ह...

हताशा !

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क्षमा चाहता हूँ कि शारीरिक व्यस्तता और मानसिक व्यथितता ने आजकल कलम द्वारा कागज़ के लेखन भंडारण क्षेत्रों में प्रवेश पर पाबंदी लगा रखी है ! मस्तिष्क और हाथ की उंगलिया हालांकि कभी-कभार निषेद्धाज्ञा का उल्लंघन करने की सोचते भी है, किन्तु वक्त अपने द्वारा अधिग्रहित और नियंत्रित क्षमताओं के क्षेत्र के विस्तार की अनुमति नहीं देता ! बस , यों समझ लीजिये कि जहाँ एक ओर अजीब सी कशमकश की स्थिति बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर अफवाहों का बाजार भी गरम है ! तेज तूफानी हवाओं के चलने और गरज के साथ छींटे पड़ने की भी आशंका जताई जा रही है! समूचे देह क्षेत्र के विभिन्न सम्प्रदायों और जातियों के बीच कोई सांप्रदायिक दंगा न भड़के, इसके लिए चक्षुगण लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है! शरीर के अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में स्थिति तनावपूर्ण मगर नियंत्रण में बताई जाती है ! खैर, आज कर्फ्यू का उल्लंघन करने के पीछे दो कारण हैं, एक तो आज शनिवार है, यानि अन्य दिनों के मुकाबले थोड़ा हल्का बोझ और दूसरे अपने आस-पास घटित हो रही घटनाएं! आज ही एक साईट पर अमेरिका में चल रहे भारतीय मूल के रजत गुप्ता और श्रीलंकाई मूल के राजारत्नम के मु...

मजेदार- पोलैंड में भगवान कृष्ण के खिलाफ केस!

(इसे आप अंगरेजी में गूगल सर्च पर भी ढूंढ सकते है ) दुनिया भर में तेजी से बढ़ता हिंदू धर्म का प्रभाव देखिये कि वारसॉ, पोलैंड में एक नन ने इस्कॉन (कृष्ण चेतना के लिए इंटरनेशनल सोसायटी) के खिलाफ एक मामला अदालत में दायर किया था ! नन ने अदालत में टिप्पणी की कि इस्कॉन अपनी गतिविधियों को पोलैंड और दुनियाभर में फैला रहा है, और पोलैंड में इस्कॉन ने अपने बहुत से अनुयायी तैयार कर लिए है ! अत: वह इस्कॉन पर प्रतिबन्ध चाहती है क्योंकि उसके अनुयायियों द्वारा उस 'कृष्णा' को महिमामंडित किया जा रहा है, जो ढीले चरित्र का था और जिसने १६,००० गोपियों से शादी कर रखी थी ! इस्कॉन के वकील ने न्यायाधीश से अनुरोध किया : "आप कृपया इस नन से वह शपथ दोहराने के लिए कहें, जो उसने नन बनते वक्त ली थी" न्यायाधीश ने नन से कहा कि वह जोर से वह शपथ सुनाये, लेकिन वह ऐसा नहीं करना चाहती थी ! फिर इस्कॉन के वकील ने खुद ही वह शपथ पढ़कर सुनाने की न्यायाधीश से अनुमति माँगी ! आगे बढ़ो, न्यायाधीश ने कहा ! उसने शपथ पढ़कर सुनाई, शपथ में यह है कि नन ने यीशु मसीह से शादी की है ! इस्कॉन के वकील ने कहा , "मी लोर्ड !...

विकसित कहलाने की कीमत !

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जापान में ९ तीव्रता के भूकंप से शुरू हुई त्रासदी थमने का नाम ही नहीं ले रही है ! फुकुशिमा के सोमा स्थित तीसरे परमाणु सयंत्र में विस्फोट के बाद दुनियाभर के वैज्ञानिकों और प्रकृति प्रेमियों के माथे पर बल पड़ने शुरू हो गए है! जापान की सरकार और परमाणु प्रतिष्ठानों की देख-रेख करने वाली एजेंसिया जहां अब तक सबकुछ नियंत्रण में होने का दावा कर रहे थे, वो भी अब सकते में आ गए है, और यह स्वीकार कर रहे है कि वहाँ परमाणु विकिरण या प्रसारण चिंताजनक स्थित में पहुच गया है ! अब सवाल यह उठता है कि यह परमाणु विकिरण क्या है, और प्रसारण के किस स्तर के बाद परमाणु विकिरण खतरनाक हो सकता है ? इसे संक्षेप में जानने के लिए मैं यह कहूंगा कि परमाणु विकिरण वह अवस्था है जब परमाणु रिसाव के बाद अस्थिर नाभिक कण वातावरण में घुलकर जैविक सामग्री जैसे जीवित उत्तकों के स्पर्श में आकर शारीरिक अंगो को जला देते है, और शरीर में कैंसर तथा मौत का कारण बनते है! भौंतिक विज्ञान अथवा चिकित्सा जगत में विकिरण खुराक को रेम (REM =roentgen equivalent in man ) में मापते है ! यूँ तो 25 rems की खुराक से ही खून में परिवर्तन नजर आने लगते है किन्...

कार्टून कुछ बोलता है-पितृत्व सुख !

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सबक !

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उन्नति के मुद्दे पर हमारा मन चाहे कितना भी सच्चा है, किन्तु , ये न भूलें  कि कुदरत  एक  आतंक परस्त,  बिगडैल बच्चा है।   यूं तो हर कोई  नजदीकिया  बढाना चाह ता है  सुन्दर सलोनो से, मगर खुद ही देख लो, जब कोई  बिगडैल बच्चा जिद पर आता है तो किस तरह खेलता है मासूम खिलोनो से।  

प्रकृति और मानव निर्मित त्रासदी की बढ़ती खतरनाक सहभागिता से सबक लेने की जरुरत !

जहां एक ओर जापान की इस ताजा भयंकर और दुखद प्राकृतिक आपदा ने समस्त प्राणी-जगत को एक सन्देश साफ़तौर पर दे डाला है कि मनुष्य अपनी कौशलता और सफलता के जितने मर्जी परचम लहराने का दावा कर ले, मगर उसका तथा धरा पर मौजूद अन्य प्राणियों का जीवन विकास प्रकृति की कृपा पर पूर्णतया निर्भर है, और रहेगा! जो लोग ये सोचते है कि वे इस धरा पर जितनी मर्जी मानव-बस्तियां बसा सकते है, जितने मर्जी जीवित रहने के वैकल्पिक स्रोत पैदा कर सकते है, इंसान को अमर बना सकते है, वे सरासर किसी गलतफहमी का शिकार है! वहीं दूसरी ओर प्रकृति ने मानव सभ्यता को यह भी चेताया है कि आपस में कोलेबोरेशन और सांठ-गाँठ न सिर्फ मनुष्य को ही अपितु प्रकृति को भी करना आता है, और वह मानव द्वारा खुद के लिए खोदी गई खाई के साथ मिलकर किसतरह अपनी विनाश लीला का सर्वांगीण विकास कर सकता है, जापान उसका जीता जागता उदाहरण है ! परसों और कल जहां एक तरह जापान ने दो-दो प्राकृतिक आपदाओं यानि ८.९ तीव्रता के भूकंप और प्रशांत महासागर में उठी तेज ३० फिट ऊँची सूनामी लहरों ( मुझे तो इसके नाम पर भी आपत्ति है, पता नहीं किस बेवकूफ ने इसका नाम सूनामी रखा जबकि इसका सही न...

कार्टून कुछ बोलता है- नए सीवीसी की तलाश जारी है !!

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खोखली मूछों के आगे बेवश नारी !

हर साल की भांति इस साल भी अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस को मनाने की तैयारियां जोरो पर है। कल यानि ८ मार्च को यह अन्तर्राष्ट्रीय नारी मुक्ति आन्दोलन अपना १०१वां जन्मदिन मनायेगा। इस अवसर पर एक बार फिर देश के भ्रष्ठ नेतागण, अफ़सरशाह और चंद समाज के ठेकेदार जनता के पैंसो पर फ्री की दावत उडाने हेतु जगह-जगह पंचतारा होटलों, सरकारी गेस्ट हाउसों और सामुदायिक भवनों मे एकत्रित होकर ''विशाल महिला सम्मेलनों'' का आयोजन कर, देश मे बढते महिलाओं के उत्पीडन पर मोटे-मोटे घडियाली आंसू बहायेंगे। भारत में महिलाओं की महत्ता को दिखाने के लिए बडी-बडी छोडेंगे, प्रतिनिधित्व मे महिलाओं को आरक्षण के मुद्दे पर संसद और राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण दिलवाने की प्रतिबद्धता को पिछ्ले पन्द्रह वर्षों की ही भांति इस वर्ष भी ताल ठोककर दोहरायेगे। और दावत उडाने के बाद अन्त मे एक बडे से बैनर के आगे वहां सम्मिलित उन तमाम नेताओ, नौकरशाहों और समाज सुधारकों के संग आयी उनकी पारिवारिक हसीन सुन्दरियॊं के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर मुस्कुराते हुए एक फोटो सेशन चलेगा, जो अगले दिन के समाचार-पत्रों की शोभा बनेगा। ...

ऑल इंडिया लवर्स पार्टी !

ज़रा यहाँ झांकिए और फिर सोचिये कि अगर यह पार्टी देश में सत्ता में आ जाये तो देश के तो वारे-न्यारे ही हो जायेंगे, संसद और विधान सभाओ में फुल अटेंन्ड़ेंस रहेगी ! हा-हा-हा...... मेरी तो इनके लिए बस यही शुभकामनाये है कि ; गुल खिलेंगे, चमन गुलजार होगा, ख़त्म यह तमाम भ्रष्टाचार होगा। न दिलों में मैल, न राग-द्वेष होगा, देश में हर ओर अमन,प्यार होगा। न मुल्ला , मुथालिक न खाप होगा, हुश्न और इश्क सबका बाप होगा। संसद, असेम्बली के गलियारों में, हर सत्र में तब मौसमे-बहार होगा। गुल खिलेंगे, चमन गुलजार होगा, देश में हर ओर अमन, प्यार होगा।।

अजनबियों पर यूं न इस तरह तुम !

अजनबियों पर यूं न इसतरह, सब कुछ वारा-न्यारा करों, दुनिया रंग-रंगीली है पगली, कनखियों से न निहारा करो।   प्यार करना जिन्हें आता नहीं, प्रेम भी उनको भाता नहीं, छज्जे में आकर, पल्लू हिलाकर, हर वक्त न इशारा करो।     जो हम तुम्हें देखें न देखे, तुम रहो सदा बेपरवाह होकर,   शीशे को ही आशिक समझकर, गेसुयें तुम सवारा करों।   तन्हाई में ख़्वाबों में खोकर,यादों में न दिल पिघलाओ, ख्याल बुनते हुए ऐसे उनींदी न ही रतियन गुजारा करो.  दुनिया रंग-रंगीली है पगली....         !

सावधान ! यह ब्लॉग्गिंग और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के 'पर' कतरने की तैयारी हो सकती है !

ब्लॉग्गिंग को आज के दौर में अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम माना जाता रहा है ! १९४७ में ब्रिटिश औपनिवेश से स्वतंत्रता के बाद भले ही इस देश के आम आदमी ने प्रत्यक्ष तौर पर ख़ास कुछ स्वतंत्रता का रसपान कभी न किया हो, मगर मैं सोचता था कि शायद अंतरजाल एक ऐसा अप्रत्यक्ष माध्यम हाल के वर्षों में इस देश के आम इंसान को मिला है, जिसमे हर कोई बेहिचक अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र है! लेकिन हमारी वर्तमान सरकार दुनिया के इस दूसरे बड़े लोकतांत्रिक देश में आमजन की इस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से कुछ ज्यादा ही घबरा गई है, ऐसा प्रतीत होता है! आज पूरे देश को जहां एक ओर गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्ठाचार और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से रोज दो-चार होना पड़ रहा है, वही दूसरी ओर इस बाबत कोई ठोस कदम उठाने की बजाये हमारी ये सरकारें उन गैर-जरूरी कामों की ओर ज्यादा सक्रिय नजर आती है जिसमे ये उस आम इंसान की आवाज दबा सके, जो इसे चुनकर संसद में भेजता है ! इससे तो यही प्रतीत होता है कि वह यह नहीं चाहती कि कोई इनके घोटालों की चर्चा अपने ब्लोगों पर करे, शायद वह यह भी नहीं चाहती कि कोई नेताओं और अफसर शाहों की गैर-कानूनी और अनैति...

कार्टून कुछ बोलता है-और ये रहा छक्का ... बौन्ड्री से बाहर !

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साकी को न जब तलक,इस बात का मलाल होगा !

मुर्गे की मौत का न जबतलक, साकी को  मलाल होगा,    तबतलक  मयखाने पे हर मुर्गा,  बेक़सूर  हलाल  होगा।    तृप्ति  भला क्यों  मिलेगी , अतृप्त किसी पियक्कड़ को, हलक उसके घुटन होगी  और दिल बद्दतर हाल होगा।   सोचा न होगा  मुर्गे ने भी कभी कि पैमानों की भीड़ में, छलकते जाम पे  किसी रोज  उसका, यूं  इस्तेमाल होगा।   चौराहा तबेले में तब्दील होगा, टुन्न आवारा पशुओं से, अंग -अंग उनके लिए उसका,  इज्जत का सवाल होगा।   बोटी -बोटीकर चबाई जायेगी, मय के प्याले भर-भरके, खर्चेगा  कोई अपनी जेब से तो कोई बाप का माल होगा।   शामे-गम कट जाए अगर 'परचेत', बिना कॉकटेल के , तेरे मयकदे की कसम साकी ,वो नजारा बेमिसाल होगा।