यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
यह कार्टून बहुत कुछ कहता है .
ReplyDeleteहा हा!
ReplyDeleteआदरणीय गोदियाल जी
ReplyDeleteनमस्कार !
कार्टून बहुत कुछ कहता है
कई दिनों व्यस्त होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका
ReplyDeleteवाह , कहाँ निशाना साधा है । :)
ReplyDeleteगोदियाल जी आजकल आपको क्या हो गया है?आपका दिमाग कहां कहां दौड जाता है?:) लाजवाब.
ReplyDeleteरामराम
लाज़वाब !
ReplyDeleteहा हा हा ...बहुत बढ़िया सर जी!
ReplyDeletebehtareen ! umda post.
ReplyDeleteसही बात ... बर्दाश्त की भी हद होती है
ReplyDeleteकार्टून बहुत कुछ कहता है|धन्यवाद|
ReplyDeleteलड्डू शड्डू बँटवायेंगे:)
ReplyDeleteमिठाई बचाना चाहते हैं..
ReplyDeleteबच्चे की शादी तक जीने की आस उत्पन्न हो जायेगी।
ReplyDeleteबेचारे बच्चे की गलती थोडे ना हे.....
ReplyDeleteबहुत बढ़िया कार्टून!
ReplyDeleteतिवारी जी का चित्रांकन अच्छा है.
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