बजती जब छम-छम पायल, दिल होकर रह जाता घायल, सच बोलूँ तो है ये दिल नादां, तेरी इक मुस्कान का कायल। जैसा भी यह इश्क है मेरा, तेरे प्यार ने पाला है, अनुराग जताने का तेरा, हर अन्दाज निराला है। अंतर का प्यासा मतवाला, तुम बनकर आई मधुबाला, ममस्पर्शी भाव जगाकर, साकी बन भरती रीता प्याला, इक बेसुध को होश में लाई,प्रिये तू ऐसी हाला है, अनुराग जताने का तेरा, हर अन्दाज निराला है। देखी जो सूरत,गला सुराही, आकाश ढूढने लगा बुराई, मिलन की पहली रुत बेला पर, चाँद ने हमसे नजर चुराई। खुसफुसाके कहें सितारे,कैसी किस्तम वाला है, अनुराग जताने का तेरा, हर अंदाज निराला है। आई जबसे हो तुम घर-द्वारे, दमक उठे सब अंगना-चौबारे, पूरे हुए, बुने वो मेरे नटखट, हर अरमां, हर ख्वाब कुंवारे। कांटे ख़त्म हुए गुलों ने,घर-दामन सम्भाला है, अनुराग जताने का तेरा, हर अंदाज निराला है। मिले तुम, अहोभाग हमारा, निष्छल ह...