...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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वाहियात
आज जैसे उन्होंने मुझे, पानी पी-पीकर कोसा, इंसानियत से 'परचेत', अब उठ गया भरोसा।
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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देशवासियों तुम हमें सत्ता देंगे तो हम तुम्हें गुजारा भत्ता देंगे। सारे भूखे-नंगों की जमात को, बिजली-पानी, कपड़ा-लत्ता देंगे। ...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
परसे हैं,
ReplyDeleteकहो,
आज भाग बरसे हैं।
समाचार,
न अचार,
न विचार।
चाटुकारिता का परिकाष्ठा है यह...
ReplyDeletenice
ReplyDeleteकोहनूर माथे सजे, कामधेनु का दुग्ध |
Deleteभेजे चाम गुलाम-कुल, युवराजा पर मुग्ध ||
सटीक.
ReplyDeleteरामराम.
सटीक प्रहार !!
ReplyDeleteHa ha ... Mast hai ...
ReplyDeleteसुन्दर प्रस्तुति ....!!
ReplyDeleteआपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार (24-07-2013) को में” “चर्चा मंच-अंकः1316” (गौशाला में लीद) पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
टोपे के साथ ही जन्मना ठीक है
ReplyDeleteबहुत सही लताड़ा।
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