यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
परसे हैं,
ReplyDeleteकहो,
आज भाग बरसे हैं।
समाचार,
न अचार,
न विचार।
चाटुकारिता का परिकाष्ठा है यह...
ReplyDeletenice
ReplyDeleteकोहनूर माथे सजे, कामधेनु का दुग्ध |
Deleteभेजे चाम गुलाम-कुल, युवराजा पर मुग्ध ||
सटीक.
ReplyDeleteरामराम.
सटीक प्रहार !!
ReplyDeleteHa ha ... Mast hai ...
ReplyDeleteसुन्दर प्रस्तुति ....!!
ReplyDeleteआपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार (24-07-2013) को में” “चर्चा मंच-अंकः1316” (गौशाला में लीद) पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
टोपे के साथ ही जन्मना ठीक है
ReplyDeleteबहुत सही लताड़ा।
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