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Showing posts from May, 2012

नवाबिन और कठपुतली !

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पहनकर नकाब हसीनों ने, कुछ पर्दानशीनों ने, गिन-गिनकर सितम ढाये, बेदर्द महजबीनों ने।   क़ातिल बड़े शातिराना थे हर अंदाज नवाबिन के, शब्द कसैले दिलों ने खाए, तीर बिषैले सीनो ने।      अंदाज-ए-ज़ुल्म वो उनका,करें तो बयां किसको ,  कर लिया किनारा अब तो, भरोसे से यक़ीनों ने।    उलटी  बही जो गंगा इस चुनार से उस चुनार तक,  जौहरी को जमकर परखा, खोटे-खरे नगीनों ने।   बेढंग यूं हो गया 'परचेत',सिलसिला ऋतुओं का , जिस्म को परेशां किया है,शरद में  पसीनों ने।  

13 मई, मातृ-दिवस को समर्पित: - माता-पिता के हमारे संबोधन : (How we address our parents):

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विभिन्न भाषाओं में माता-पिता के लिए हमारे संबोधन How to say "Mother and "Father" in Different languages: अपने देश में : (In India):     माता/मात (Mother )        पिता/तात (Father)      संस्कृत (Sanskrit)       मातृ(Matr)/जननी(Janani)     पितृ,जनक,((Pitr)/Janak/tatah) क्षेत्र /प्रदेश अनुसार ( Area/ Region wise) : चलिए कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र से शुरू करते है:- (Let's start from Laddakh region of Kashmir): १.लद्दाख (Laddakh)        अनो,अमो,जीजी,                        अता,बाबा,अबा (लद्दाखी, बल्टी और भोटी)    अमा, एमा,                                  ...