Wednesday, July 1, 2026

मार

कजरारी जुल्फ़ों और गलमुच्छों का रंग 

कब धवल हुआ 'परचेत', कुछ पता ही न चला,

बस, साज़ और सामान जुटाने मे ही मसरूफ़ रह गया, 

वक्त कब हाथ से निकल गया, कुछ पता ही न चला।

मार

कजरारी जुल्फ़ों और गलमुच्छों का रंग  कब धवल हुआ 'परचेत', कुछ पता ही न चला, बस, साज़ और सामान जुटाने मे ही मसरूफ़ रह गया,  वक्त कब हा...