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Showing posts from July, 2026

ओझल

 वादों-इरादों की राह बहुत लम्बी थी, मैं ऊब गया, आसां जो तेरे प्यार की दरिया मिली, मै डूब गया।

यथार्थता

सफर रुका नहीं और  मिलते गये काफिले हमको, शिकवे गले मिले और दिल पे लगा गये गिले हमको,  इम्तहानों के दौर से,  हम बेधडक गुज़रे हैं 'परचेत', हौंसले रक्त से मिले  और फैसले वक्त से मिले हमको।

विडम्बना देखिए

  दोनों की ही सरकारी नौकरी थी,  अच्छी तनख्वाह के अलावा, ऊपरी मे भी खूब लूटा-खसौटा, सोना-चांदी जो हाथ आया समेटा, कुछ नहीं तो भागते चोर का लंगोटा। अपने दोनों ही बच्चों को  उन्होंने  अच्छे स्कूलों से तालीम दिलवाई किसी कोर्स के लिए प्रतिस्पर्धा से जब वो चयनीत न हो पाए तो अवैध चंदे की थाली सजवाई। बच्चे दोनों मूल छोड़कर अपना अब, विदेश जाकर बस गए हैं, और मां-बाप सूरत को तरस गये हैं, लौटकर  मिलने आएंगे वो कभी, पति-पत्नी इसी भ्रम मे है, बाप पिछले साल गुजर गया, मां अभी वृद्धाश्रम मे है।

संयोग

  ठुकरा गई थी वो जो हमको  दौर-ए-जवानी कुछ तन्हाइयां, उम्र के इस पड़ाव पर फिर से, बेताब हैं हमें गले लगाने को 'परचेत'। 

विडंबना

 न नींद ही बची,  न खुद को  मच्छरों से ही बचा पाए, रात भर खुजलाते-खुजलाते करते रहे हाये-हाए, पैर पसारने को हमने चारपाई और चादर बडी की थी,  मगर 'परचेत',  फिर भी खुलकर नही सो पाए।

बेवक्त

कुछ बेहुदे सवाल,  इस वक्त पे ना ही पूछिए  हमसे जनाब, अभी-अभी लौट के आए हैं,  दफ़न करके,  दिल के अधूरे ख़्वाब।

मेरा नसीब

पूछा भी तो किससे तुमने  मिरे बारे मे 'परचेत', वो नकचढ़ा नसीब है, अक्सर मुझसे ख़फ़ा ही रहता है।

जज्बा

मिरी आदत मे शुमार है  मेरी साफगोई का असर,  जो मुंह में आता है वो  मैं बेधड़क बोल देता हूं, कोई मेरी ढलती उम्र पर न जाए  तो बेहतर होगा 'परचेत', बत्तीसी आधी रह गई फिर भी  बीयर की बोतल का ढक्कन,  मैं अभी भी दांतों से खोल देता हूं। #औरमधुशालाकीशाकीमेरामुहतकतीरहजातीहै 🤣

नहीं समझोगे ,,,

हमारे लिए तो तुम  हमेशा अहम थे  मगर पाले तुमने ही  कुछ वहम थे,  तेरे वास्ते मुसीबतों मे भी मुश्किलों को  जिसने गले लगाया, वो हम थे,                          लिबास बदलने से बदल नहीं जाता  फ़क़त कोई किरदार 'परचेत', तुम जानते हो, तमाशा खडा करने मे  वरना  हम क्या किसी से कम थे?

अधूरे ख्वाब

खुशियों तक पहुंचने के दिल मे अरमान बहुत थे, नहीं पहुंच पाया 'परचेत' राह मे  तूफान बहुत थे।

गुस्सा

अपनी हर परेशानी का सबब, मैं तेरे मूंह पे फेंक देता, गर ये कश्ती का मुसाफिर 'परचेत', समंदर देख लेता।

मेरा देश महान!

  कुशल नेतृत्व और दृढ़ संकल्प के लिए  ५६ इंच की छाती ढूंढते हैं, और रोज़मर्रा के संचालन के लिए  अनुसूचित जाति, जनजाति ढूंढते हैं

अधूरा शेर...5

पडोस का माहौल, आबोहवा और रहन-सहन,  बिन बात खिलखिलाना, ठिकाना रास आना, अगर हमसे पूछना ही है 'परचेत, तो यह पूछो  कि किया जाता है कैसे मुस्कुराकर गम छुपाना।

अधूरा शेर....4

यही पूछने को बेताब है 'परचेत' जमाने भर से कि  आखिर दीखता कैंसा होगा पलकों का शामियाना ।

अधूरा शेर...3

सच बोलने का फलसफा कुछ ऐसा मिला 'परचेत', कि किसी ने भी बढ़कर कभी गले नहीं लगाया।

अधूरा शेर...2

सबकी उलझनों को सुलझाने मे ही बसर गई, उलझी अपनी भी थी 'परचेत', मगर गुज़र गई...

अधूरा शेर

 ........नहीं मालूम कि सज़ा भुगती है   अबतक किस जुर्म की 'परचेत', उम्र गुजर भी गई है तो क्या, यकीं रख, वक्त अभी अच्छा भी आ सकता है।

विडम्बना

हमने तो बस उन्हें  जिंदगी के एग्जाम की सलाह दी थी, नही मालूम था कि वो, इल्जाम लगाने मे इतने माहिर होगें।

चराग तले...

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  नाम सूरत और शहर की ऐसी सूरत, आ जाते हैं, मुंह उठाके ज़रूरत बे-ज़रूरत, मशहूर हो जाने की ख़्वाहिश है मगर, चराग ढूंढे है फिर भी 'परचेत', अंधेरे की मूरत।

मार

कजरारी जुल्फ़ों और गलमुच्छों का रंग  कब धवल हुआ 'परचेत', कुछ पता ही न चला, बस, साज़ और सामान जुटाने मे ही मसरूफ़ रह गया,  वक्त कब हाथ से निकल गया, कुछ पता ही न चला।