पता, क्या पता..?
इस मानसून की विदाई पर, जो कुछ मौसमी प्रेम बीज तू , मेरे दिल के दरीचे मे बोएगी, यूं तो खास मालूम नहीं , मगर यदि वो अंकुरित न हुए तो इतना पता है कि तू बिजली बुझाकर, अ़ंधेरे मे फूट-फूट के रोएगी। #बरसातीप्यार 😀😀
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !