इस मानसून की विदाई पर,
जो कुछ मौसमी प्रेम बीज तू ,
मेरे दिल के दरीचे मे बोएगी,
यूं तो खास मालूम नहीं , मगर
यदि वो अंकुरित न हुए तो
इतना पता है कि तू बिजली बुझाकर,
अ़ंधेरे मे फूट-फूट के रोएगी।
#बरसातीप्यार 😀😀
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
वर्ण आखिरी, वैश्य, क्षत्रिय, विप्र सभी, सनातनी नववर्ष का जश्न मनाया कभी ? नहीं, स्व-नवबर्ष के प्रति जब व्यवहार ऐसा, फिर पश्चिमी नवबर्ष पर...
बहुत खूब।
ReplyDeleteवाह
ReplyDeleteजी नमस्ते ,
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार(२६-०९ -२०२२ ) को 'तू हमेशा दिल में रहती है'(चर्चा-अंक -४५६३) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
वाह.बहुत खूब
ReplyDeleteओह! अद्भुत।
ReplyDeleteबहुत सुंदर।
आभार, आप सभी ब्लॉग मित्रों का🙏
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर रचना
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