कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं
कि जो फटते नहीं,
फासले अगर बढ़ने लगेंतो फिर घटते नहीं।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
गलियां सब वीरां-वीरां सी, उखड़े-उखड़े सभी खूंटे थे, तमाशबीन बने बैठे दो सितारे, सहमे-सहमे से रूठे थे। डरी सूरत बता रही थी,बिखरे महीन कांच क...
सटीक
ReplyDeleteNice Post.
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