मैंने ख्वाब देखा था,
ख्वाहिश अधूरी रही,
चाटने वाले चाट गए,
प्लेट साफ पूरी रही।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
अपनी हर परेशानी का सबब, मैं तेरे मूंह पे फेंक देता, गर ये कश्ती का मुसाफिर 'परचेत', समंदर देख लेता।
सुंदर
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