Saturday, May 30, 2026

चटोरों की....

मैंने ख्वाब देखा था,

ख्वाहिश अधूरी रही,

चाटने वाले चाट गए,

प्लेट साफ पूरी रही।


1 comment:

गुस्सा

अपनी हर परेशानी का सबब, मैं तेरे मूंह पे फेंक देता, गर ये कश्ती का मुसाफिर 'परचेत', समंदर देख लेता।