Monday, May 25, 2026

टीस

तूफान, नदियां समंदर पे 

तू न इस तरह हमसे सवाल कर,

डूबती हुई कई कश्तियां 

हम भी लाए हैं भंवर से निकाल कर।

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छुपा लो जितना छुपाना है  खुद को,

परदो के पीछे, फिर नहीं आएंगे हम,

बस, और कुछ दिनों की ही बात है,

किसी दिन लेटे-लेटे तेरी गली से गुजर जाएंगे हम।

xxxxxxxxxxxxxxx

हम गाय,भैंस,घोड़े नहीं थे, 

फिर भी बंधे हमेशा तबेले रहे,

तन्हाइयां साथ अपने बहुत थी,

सफर में किन्तु अकेले रहे।


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टीस

तूफान, नदियां समंदर पे  तू न इस तरह हमसे सवाल कर, डूबती हुई कई कश्तियां  हम भी लाए हैं भंवर से निकाल कर। xxxxxxxxxxxxxxx छुपा लो जितना छुपान...