टीस
तूफान, नदियां समंदर पे
तू न इस तरह हमसे सवाल कर,
डूबती हुई कई कश्तियां
हम भी लाए हैं भंवर से निकाल कर।
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छुपा लो जितना छुपाना है खुद को,
परदो के पीछे, फिर नहीं आएंगे हम,
बस, और कुछ दिनों की ही बात है,
किसी दिन लेटे-लेटे तेरी गली से गुजर जाएंगे हम।
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हम गाय,भैंस,घोड़े नहीं थे,
फिर भी बंधे हमेशा तबेले रहे,
तन्हाइयां साथ अपने बहुत थी,
सफर में किन्तु अकेले रहे।
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