गिले-शिकवे तुम हजार करोगे और
खुदा होने का दावा भी बार-बार करोगे,
'परचेत' पूछता है अरे वो जाहिलों,
खुद के दिल से खुद का कब दीदार करोगे।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
उसका स्वरूप हरदम सराहता हूं, जिस रोशनी को दिल से चाहता हूं, आश लगाए रहता हूं कि रोशनी कभी तो मेरे घर आएगी, अतिशय प्रेममय होकर आलिंगनबद्...
सुंदर
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