...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
खुदगर्जी के वास्ते न कभी
किसी को बदनाम किया तूने,
किसी की भी उपलब्धियों को
न कभी अपने नाम किया तूने,
क्योंकि तू इक हद की हद तक
परचेत था 'परचेत',
इसलिए जिंदगीभर,
अपनी शर्तो पर काम किया तूने।
सुंदर
🙏🙏
नाम सूरत और शहर की ऐसी सूरत, आ जाते हैं, मुंह उठाके ज़रूरत बे-ज़रूरत, मशहूर हो जाने की ख़्वाहिश है मगर, चराग ढूंढे है फिर भी 'परचेत...
सुंदर
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