Saturday, May 23, 2026

तसल्ली

खुदगर्जी के वास्ते न कभी 

किसी को बदनाम किया तूने,

किसी की भी उपलब्धियों को 

न कभी अपने नाम किया तूने,

क्योंकि तू इक  हद की हद तक

परचेत था 'परचेत', 

इसलिए जिंदगीभर, 

अपनी शर्तो पर काम किया तूने।

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चराग तले...

  नाम सूरत और शहर की ऐसी सूरत, आ जाते हैं, मुंह उठाके ज़रूरत बे-ज़रूरत, मशहूर हो जाने की ख़्वाहिश है मगर, चराग ढूंढे है फिर भी 'परचेत...