आरज़ू

जो किसी के भी दिल में नहीं बसता हो,

उसे तू अपने दिल में ऐसे न  बसाया कर, 

इतनी सी आरज़ू है तुझसे मेरी 'परचेत',

अपना ग़म लेके इधर-उधर मत जाया कर।


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