Friday, May 15, 2026

आरज़ू

जो किसी के भी दिल में नहीं बसता हो,

उसे तू अपने दिल में ऐसे न  बसाया कर, 

इतनी सी आरज़ू है तुझसे मेरी 'परचेत',

अपना ग़म लेके इधर-उधर मत जाया कर।


1 comment:

चटोरों की....

मैंने ख्वाब देखा था, ख्वाहिश अधूरी रही, चाटने वाले चाट गए, प्लेट साफ पूरी रही।