Wednesday, May 13, 2026

क्षणभंगुर

 उनको देखकर कुछ न भाया,

सहज थे,असहज से भा गए,

नूर चेहरे का तो तब छलका,

महफ़िल में जब तुम आ गए।

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चटोरों की....

मैंने ख्वाब देखा था, ख्वाहिश अधूरी रही, चाटने वाले चाट गए, प्लेट साफ पूरी रही।