उसका स्वरूप
हरदम सराहता हूं,
जिस रोशनी को
दिल से चाहता हूं,
आश लगाए रहता हूं
कि रोशनी कभी तो
मेरे घर आएगी,
अतिशय प्रेममय होकर
आलिंगनबद्ध हो जाएगी।
सुबह-सवेरे उठकर
खोल देता हूं घरके
सारे किवाड़, परदे,
उम्मीद का बस, इतना सहारा,
मेहनत कभी तो रंग लाएगी।।
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