खुबसूरत सपने हमने भी सजाए थे,
क्योंकि हम भी कभी फितरत वाले थे,
पूरे न हुए वो अलग बात है, 'परचेत',
मगर ख्वाब तो हमनें भी बहुत पाले थे।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
खुबसूरत सपने हमने भी सजाए थे, क्योंकि हम भी कभी फितरत वाले थे, पूरे न हुए वो अलग बात है, 'परचेत', मगर ख्वाब तो हमनें भी बहुत पाले थे...
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