खुबसूरत सपने हमने भी सजाए थे,
क्योंकि हम भी कभी फितरत वाले थे,
पूरे न हुए वो अलग बात है, 'परचेत',
मगर ख्वाब तो हमनें भी बहुत पाले थे।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
अपनी हर परेशानी का सबब, मैं तेरे मूंह पे फेंक देता, गर ये कश्ती का मुसाफिर 'परचेत', समंदर देख लेता।
सुंदर
ReplyDelete🙏🙏
Deleteबहुत खूबसूरत पंक्तियाँ हैं। सच तो यह है कि हर इंसान अपनी जिंदगी में कभी न कभी बड़े सपने देखता है। कुछ सपने पूरे हो जाते हैं और कुछ अधूरे रह जाते हैं, लेकिन सपने देखना कभी गलत नहीं होता। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
ReplyDeleteअधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
धन्यवाद
🙏🙏
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