एक पुष्प की अभिलाषा।
मुझे चाहिए इक ऐसा दूल्हा,
घर मे फूक सके जो चूल्हा,
करे जो मन, कभी झूलन को झूला,
दर्द करे ना कोई उसका
पिंडली, एंडी और कूल्हा,
मुझे चाहिए इक ऐसा दूल्हा,
घर मे फूक सके जो चूल्हा।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
2 Comments:
हा हा
🙏🙏
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