गर दृष्टा ही सही होती, दृष्टिकोण ही बदल जाता,
दिल मे न गिला रखते, जुबां पर न सिकवा आता,
सब्र से उठा लेते, उनकी हर इक तशद्दुद 'परचेत',
कमबख़्त ऐ वक्त तू जो अगर, वक्त पर आ जाता।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
गर दृष्टा ही सही होती, दृष्टिकोण ही बदल जाता, दिल मे न गिला रखते, जुबां पर न सिकवा आता, सब्र से उठा लेते, उनकी हर इक तशद्दुद ' परचेत...
No comments:
Post a Comment