ख़्याल !
दिल मे न गिला रखते, जुबां पर न सिकवा आता,
गर दृष्टा ही सही होती, दृष्टिकोण ही बदल जाता,
सब्र से उठा लेते, उनकी हर इक तशद्दुद 'परचेत',
कमबख़्त ऐ वक्त, तू जो अगर वक्त पर आ जाता।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
2 Comments:
वाह
🙏🙏
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