Tuesday, June 9, 2026

ख़्याल !

दिल मे न गिला रखते, जुबां पर न  सिकवा आता,

गर दृष्टा ही सही होती, दृष्टिकोण ही बदल जाता,

सब्र से उठा लेते, उनकी हर इक तशद्दुद 'परचेत',

कमबख़्त ऐ वक्त, तू जो अगर वक्त पर आ जाता।


तशद्दुद=ज़ुल्म 



2 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

वाह

Tuesday, 09 June, 2026  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

🙏🙏

Tuesday, 09 June, 2026  

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