Thursday, June 11, 2026

बदलता मौसम

 जज़्बात अब हदों से आगे बढ़ने लगे हैं,

अल्फ़ाज़, खामोशियों से झगड़ने लगे हैं,

हर चीज तय दायरे पार करने लगी है,

अंदाज मे खुमारी 'परचेत', 

मदहोशियों के रंग चढ़ने लगे हैं।

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मार

कजरारी जुल्फ़ों और गलमुच्छों का रंग  कब धवल हुआ 'परचेत', कुछ पता ही न चला, बस, साज़ और सामान जुटाने मे ही मसरूफ़ रह गया,  वक्त कब हा...