बदलता मौसम

 जज़्बात अब हदों से आगे बढ़ने लगे हैं,

अल्फ़ाज़, खामोशियों से झगड़ने लगे हैं,

हर चीज तय दायरे पार करने लगी है,

अंदाज मे खुमारी 'परचेत', 

मदहोशियों के रंग चढ़ने लगे हैं।

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