Saturday, May 30, 2026

चटोरों की....

मैंने ख्वाब देखा था,

ख्वाहिश अधूरी रही,

चाटने वाले चाट गए,

प्लेट साफ पूरी रही।


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एक पुष्प की अभिलाषा।

  मुझे चाहिए इक ऐसा दूल्हा, घर मे फूक सके जो चूल्हा, करे जो मन, कभी झूलन को झूला, दर्द करे ना कोई उसका पिंडली, एंडी और कूल्हा, मुझे चाहिए इक...