तमन्ना

तुम्हारे ओठों से चिपककर सांसों के सहारे,

तुमपर ही समर्पित हो जाता,

ऐ काश कि अगर 'परचेत' ! 

मैं तुम्हारे सान्निध्य की कोई बांसुरी होता।

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

यूं भी बावफा होते है लोग !

धार्मिक भावनाएं क्या हुई, कोई छुई-मुई हो गई !

'नारी' की चिंता में दुबले कुछ ब्लॉगर मित्र !