तुम्हारे ओठों से चिपककर सांसों के सहारे,
तुमपर ही समर्पित हो जाता,
ऐ काश कि अगर 'परचेत' !
मैं तुम्हारे सान्निध्य की कोई बांसुरी होता।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
तुम्हारे ओठों से चिपककर सांसों के सहारे, तुमपर ही समर्पित हो जाता, ऐ काश कि अगर 'परचेत' ! मैं तुम्हारे सान्निध्य की कोई बांसुरी ...
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