Monday, February 2, 2026

स्वीकारोक्ति

हिम्मत ही नहीं रही जब,

दिखाने को कुछ नया करके,

फायदा ही क्या है 'परचेत',

तब अफसानें बयां करके।




1 comment:

इल्तज़ा

  मोहब्बत मे, आंखों मे भर आए आंसुओं को गिरने न देना 'परचेत', क्योंकि प्यार के आंसू ही रूह की खुराक होते हैं।