Monday, February 2, 2026

स्वीकारोक्ति

हिम्मत ही नहीं रही जब,

दिखाने को कुछ नया करके,

फायदा ही क्या है 'परचेत',

अब, अफसानें बयां करके।




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स्वीकारोक्ति

हिम्मत ही नहीं रही जब, दिखाने को कुछ नया करके, फायदा ही क्या है 'परचेत', अब, अफसानें बयां करके।