Wednesday, February 4, 2026

तहक़ीक़ात अभी जारी है

रिश्तों की खाइयों को पाटिये कि अब और न बढ़ें,

दिलों के सहरा में नजर आ रही दरार बहुत भारी है,

अगम्य राह, सत्य का पथ इतना दुर्गम कैसे हो गया,

बाधित क्यों है आवाजाही, तहक़ीक़ात अभी जारी है।‌


सदचित विभ्रम है और कानून  का कोई खौफ नहीं, 

राष्ट्र भयभीत किया जा रहा, बिखरने की तैयारी है, 

समृद्धि के पथ पर पता नहीं यह कौन सी दुश्वारी है, 

संयम पांवों तले क्यों आया, तहक़ीक़ात अभी जारी है।


1 comment:

सलाह

तू खुद ही से इकबार रूबरू तो हो जा, फिर जो कहना है, उसे आलेख लेना, अरे वो, कश्ती के मुसाफिर, उतरने से पहले, एकबार समन्दर तो जाकर देख लेना।