Wednesday, February 25, 2026

लुभावना

सफर मे धूप तो बहुत होगी,

सूरज को ढक सको तो चलो, 

एम्बूलैंस लेकर जा रही है रोगी, 

राह उसकी रोक सको तो चलो।

1 comment:

ख़्याल !

दिल मे न गिला रखते, जुबां पर न  सिकवा आता, गर दृष्टा ही सही होती, दृष्टिकोण ही बदल जाता, सब्र से उठा लेते, उनकी हर इक  तशद्दुद ' परचेत...