Friday, February 6, 2026

ऐ जिंदगी!

अब और कहां तक  होगी इससे भी बदसूरत ज़्यादा,

जिंदगी, तू जिंदा कम नजर आती है, मूरत ज्यादा।



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लुभावना

सफर मे धूप तो बहुत होगी, सूरज को ढक सको तो चलो,  एम्बूलैंस लेकर जा रही है रोगी,  राह उसकी रोक सको तो चलो।