सवाल ये नहीं है कि जवानी में हम क्यों जीने मरने की कसमें खाते हैं,
सवाल ये है कि साठ के बाद ही क्यों 'परचेत',दर्द भरे गीत पसंद आते हैं।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
उजागर न होने दिया हमने उजागर न करने के ऐब से, वाकिफ बहुत खूब थे हम, तुम्हारे छल और फरेब से।
आज फ्री था।
ReplyDeleteहा हा
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