Sunday, February 8, 2026

हकीकत

बेवफा क्या हुआ,

कतार में खड़े हैं कुशलक्षेम पूछने वाले,

जब बावफ़ा था 'परचेत' 

तो गली का कुत्ता भी  नहीं पूछता था।



3 comments:

  1. प समाज की दोहरी आदत को एक झटके में पकड़ लेते हैं। वफ़ादारी में कोई पूछता नहीं और बेवफ़ाई में सब हालचाल लेने आ जाते हैं। नाम के साथ खेलकर आपने भाव और व्यंग्य दोनों साधे हैं। यह शेर दिखाता है कि लोग इंसान नहीं, उसकी स्थिति देखते हैं।

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सलाह!

मत दिया कर दोष तू हमको  दरारों में झांकने का , ऐ दोस्त! तेरी नादानियों का खामियाजा, भला ये, तमाम जमाना क्यों भुगते?