बेवफा क्या हुआ,
कतार में खड़े हैं कुशलक्षेम पूछने वाले,
जब बावफ़ा था 'परचेत'
तो गली का कुत्ता भी नहीं पूछता था।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
मैं सो रहा हूं मर्जी के हिसाब से, मुझे अपनी मर्जी के हिसाब से जागना है, मत रुको मेरे लिए, ऐ ज़िन्दगी, तू भाग ले, जितनी तेजी से तुझे भागना ह...
प समाज की दोहरी आदत को एक झटके में पकड़ लेते हैं। वफ़ादारी में कोई पूछता नहीं और बेवफ़ाई में सब हालचाल लेने आ जाते हैं। नाम के साथ खेलकर आपने भाव और व्यंग्य दोनों साधे हैं। यह शेर दिखाता है कि लोग इंसान नहीं, उसकी स्थिति देखते हैं।
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Deleteगजब
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