ओ रे पिया, मैं तुम्हारी

अपना तन-मन लुटा के हारी,

ओ रे पिया, मैं तुम्हारी,

आगोश तुम्हारे, मेरा सुलभ लगे मन,

चाहे तन हो कितना ही भारी,

ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।


संबंधों के तौर-तरीके मैं ना जानू,

और बनावटीपन मैं ना मानू,

या फिर कह लो दुनियादारी,

अब रह नहीं सकती मैं कुंवारी,

 ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।


कोमल हूं पर कमजोर नहीं हूं,

सहमी-सहमी भोर नहीं  हूं,

हर पल साथ खड़े हो जब तुम,

कहके दिखाए कोई मुझे अबला नारी,

 ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।




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