Sunday, April 19, 2026

सवाल

किस राह मे गिर गया, अबे 'परचेत'  साले!

फूल था और राह तूने अपनी कांटों की चुनी!

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कश्मकश

खुबसूरत सपने हमने भी सजाए थे, क्योंकि हम भी कभी फितरत वाले थे, पूरे न हुए वो अलग बात है, 'परचेत', मगर ख्वाब तो हमनें भी बहुत पाले थे...