किस राह मे गिर गया, अबे 'परचेत' साले!
फूल था और राह तूने अपनी कांटों की चुनी!
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
अपनी हर परेशानी का सबब, मैं तेरे मूंह पे फेंक देता, गर ये कश्ती का मुसाफिर 'परचेत', समंदर देख लेता।
No comments:
Post a Comment